उप चुनाव को लेकर बिसात बिछना शुरु
अखिलेश चाह रहे विपक्ष का गठबंधन
फुलपुर व गोरखपुर के उप चुनाव अगले साल का टे्रलर होगा

लखनऊ। फुलपुर व गोरखपुर संसदीय सीट के उप चुनाव ११ मार्च को होंगे इसके साथ ही उत्तर प्रदेश में इसके लिए अभी से बिसात बिछनी शुरु हो गयी है।
फुलपुर संसदीय सीट उप मुख्यमंत्री केशव देव मौर्य और गोरखपुर संसदीय सीट मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के इस्तीफे से रिक्त हुई है। दोनों विधान परिषद के लिए चुने जा चुके हैं।इसके साथ ही चुनाव आयोग ने बिहार के अररिया लोकसभा सीट के उप चुनाव की घोषणा की है। इनकी मतगणना १४ मार्च को होगी।
फुलपुर व गोरखपुर लोकसभा सीट २०१४ के चुनाव में भाजपा ने जीती थी। भाजपा जहां इन दोनों सीटों को फिर से जीतने के लिए अभी से ऐड़ी चोटी का जोर लगा रही है तो वहीं विपक्ष की तीन प्रमुख पाॢटयां समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी और कांग्रेस भी इस चुनाव को लेकर आपस में संपर्क स्थापित करना चाह रही है। गुजरात विधानसभा और राजस्थान के उप चुनाव से कांग्रेस काफी उत्साहित है लेकिन उत्तर प्रदेश में उसकी अभी ऐसी हालत है कि उसे बैसाखी के बगैर चलना दुश्वार हो रहा है।
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव, भाजपा को हराने के लिए मजबूत विपक्षी गठबंधन चाहते है, कांग्रेस ऊपरी तौर पर इसके लिए राजी है लेकिन बहुजन समाज पार्टी की मुखिया व पूर्व मुख्यमंत्री मायावती अभी अपने पत्ते नहीं खोल रही हैं।
भाजपा नहीं चाहती कि विपक्षी पाॢटयों में किसी तरह का गठबंधन हो। क्योंकि अगर गठबंधन हो गया तो भाजपा के लिए परेशानी होगी और ऐसा नहीं होता तो विपक्षी वोटों के बिखराव का लाभ भाजपा को मिल जायेगा। इस बारे में नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के प्रदेश अध्यक्ष प्रो.डा.रमेश दीक्षित का मानना के उप चुनाव ही नहीं बल्कि अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव के लिए भी विपक्षा का गठबंधन बहुत जरुरी है। उनका कहना है कि अखिलेश सही दिशा में काम कर रहे है और वह अभी युवा भी हैं। अगर तीनों पाॢटयां इस पर गंभीरता से काम करें तो यह संभव भी है। मायावती पहले गठबंधन से इंकार कर रही थी लेकिन पिछले दिनों उन्होंने इशारा किया था कि वक्त के हिसाब से गठबंधन किया जा सकता है।
इस उप- चुनाव के लिए नामांकन १३ से २० फरवरी के बीच होना है। इसलिए उप चुनाव के लिए दस दिन के अंदर ही गठबंधन हो जाये। विपक्ष इस उप चुनाव में जहां मंहगाई, कानून व व्यवस्था, बेरोजगारी, फर्जी इंकाउटर का मुद्दा उठायेगी तो वहीं सत्तारूढ़ भाजपा प्रधानमंत्री के एंजेडे के अलावा अयोध्या का कार्ड भी खेलेगी और भव्य राममंदिर का मुद्दा उठा सकती है। श्रीश्री रविशंकर के साथ कुछ मुस्लिम संगठनों की बातचीत को इसी नजरिये से देखा जा रहा है।
देखना यह है कि गोरखपुर व फुलपूर से भाजपा किसे अपना उम्मीदवार बनाती है। केशव प्रसाद मौर्य ने तो यह साफ कर दिया है कि फुलपूर से उनके परिवार का कोई भी सदस्य चुनाव नहीं लड़ेगा। लेकिन यह तय है कि इस सीट से किसी पिछड़ी जाति का उम्मीदवार भाजपा उतारेगी। जहां तक गोरखपुर का मामला है तो यहां से योगी आदित्यनाथ की पंसद का ही आदमी भाजपा का उम्मीदवार होगा। फुलपुर व गोरखपुर लोकसभा के उप-चुनाव अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव के टे्रलर माने जा रहे हैं।
सैयद निजाम अली की रिपोर्ट ————–
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