थमने का नाम नही ले रही टाण्डा से लखनऊ फर्राटा भरने वाली डग्गामार बसों की रफ्तार
बस मालिक कहते फिरते है की शासन में है हमारी मजबूत पकड़ कोई नहीं बन्द करवा सकता हमारी बसे
टाण्डा- अम्बेडकरनगर-टाण्डा नगर से लखनऊ जाने वाली डग्गामार बसो की रफ़्तार परिवाहन विभाग द्वारा हस्तक्षेप के बाद भी कम होने का नाम नही ले रही है चर्चा है की परिवाहन विभाग ऊपरी आमदनी बढ़ाने के लिए सख्ती करते है और फिर मोटी रकम लेकर छोड़ देते है इन डग्गामार बसो के संचालको के ऊचे रसूख व परिवाहन विभाग के अधिकारियो की मिली भगत से चलने वाली इन बसो पर परिवाहन मंत्री की सख्ती का कोई असर देखने को नही मिल रहा है। ज्ञात हो की इन डग्गामार बसो की तरफ परिवाहन विभाग के मंत्री व अधिकारयों का ध्यान कई बार आकर्शित कराया गया जा चुका था जिसपर अब तक कोई कार्यवाही नहीं की जा रही है। परिवाहन विभाग द्वारा इन अवैध डग्गामार बसों से प्रति माह मोटी रकम वसूलती है साथ ही टाण्डा नगर के जुबैर चौराहे को इन डग्गामार बसों के संचालको ने अपना ठिकाना बना रखा है जहां पर यह बकायदा बोर्ड लगा कर अवैध रूप से इन डग्गामार बसों का संचालन करते चले आ रहे है।

टाण्डा नगर से लखनऊ राष्ट्रीय राज्य मार्ग पर फर्राटा भरने वाली इन डग्गामार बसों पर जहां अब परिवाहन विभाग के मंत्री के हस्तछेप के बाद भी इसपर पूरी तरह लगाम नहीं लग पा रही है। इन डग्गामार बसों के संचालको का रसूख इतना ज्यादा है की कोई भी अधिकारी पिछले कई वर्षो से इन डग्गामार बसों को पूरी तरह रोक पाने में असमर्थ रहा है। इन डग्गामार बसो को रोकने के लिए परिवाहन विभाग के आला अधिकारियो ने कई बार अभियान चलाया लेकिन कुछ दिनों बाद ही यह अभियान इन डग्गामार बसों के संचालको के उंचे रसूख के आगे बंद हो जाता है। नियम विरुद्ध विगत कई वर्षो से चल रही यह डग्गामार बसे परिवाहन विभाग के अधिकारियो की मिली भगत से चल रही थी लेकिन इन अधिकारियो पर कोई कार्यवाही न होना चर्चा का विषय बनी हुई है। टाण्डा नगर के जुबैर चौराहे पर इन डग्गामार बसो के संचालको ने अपना ठिकाना बना रखा है जहांपर बाकायदा आफिस बना कर टाण्डा से लखनऊ के लिए टिकट बुक कराया जाता है और फिर सुबह से ही यह डग्गामार बसें टाण्डा नगर के बस स्टेशन के सामने आ कर लगती और सवारियां भर कर अपने गंतव्य की तरफ चली जाती है। इन डग्गामार बसों के संचालको का रसूख इतना ज्यादा है की यह लोग टाण्डा से लखनऊ चलने वाली परिवाहन विभाग की बसों को चलने नहीं देते और कुछ दिन चलने के बाद यह बसे बंद हो जाती है। इनमे परिवाहन विभाग भी इनका साथ देता है क्योकि इन डग्गामार बसो के चलने से एक तयसुदा रकम प्रति माह परिवाहन विभाग के अधिकारियो के पास पहुंच जाती थी इसके आलावा सबसे ख़ास बात तो यह है की अम्बेडकरनगर जनपद फैजाबाद जनपद बाराबंकी जनपद व लखनऊ तक के परिवाहन विभाग के किसी अधिकारी में आजतक इन डग्गामार बसों को रोकने की हिम्मत नहीं अब देखना यह है की इन डग्गामार बसों पर कब तक लगाम लगती है जबकि आरटीओ अम्बेडकरनगर ने बताया की कोई भी बस सवारी भर कर नहीं ले जा सकती केवल बुकिंग पर ही जा सकती है।
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