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फर्जी न्यूरोफिजीशियन व फ़र्ज़ी विशेषज्ञता द्वारा मरीजों को कर रहे गुमराह : एसआईसी
वर्तमान में जिला अस्पताल में है कार्यरत डॉ0 वी0के0 चौधरी, अक्टूबर 2016 से चल रहे लगातार अनुपस्थित
मनव्वर रिज़वी
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गोरखपुर । मंगलवार की सुबह जिला अस्पताल के मुख्य गेट के ठीक बगल में किसी न्यूरोफिजिशियन डॉ0 वी0के0 चौधरी का बोर्ड लगा देखा गया और जब कौतूहलवश उस सम्बन्ध में जानकारी ली गई तो पता चला की नेताजी सुभाष चंद्र बोस जिला चिकित्सालय के डॉ0 वी0के0 चौधरी उर्फ डॉ0 विजय कुमार चौधरी फिजीशियन के रूप में सरकारी सेवा में कार्यरत हैं लेकिन पिछले अक्टूबर 2016 से वह लगातार अनुपस्थित चल रहे हैं । हालांकि न तो डॉ0 चौधरी ने वीआरएस लिया है और न ही सरकारी सेवा से त्यागपत्र ही दिया । बावजूद इसके सरकारी आदेश को ठेंगा दिखाते हुए धड़ल्ले से वह प्राइवेट प्रैक्टिस कर रहे हैं । इस संबंध में जिला अस्पताल के प्रमुख अधीक्षक डॉ0 एच0आर0 यादव से जानकारी चाही गई तो उन्होंने बताया कि उन्हें मंगलवार की सुबह ही पता चला है कि अस्पताल गेट के ठीक बगल में डॉ0 वी0 के0 चौधरी उर्फ डॉ0 विजय कुमार चौधरी की प्राइवेट क्लीनिक का बोर्ड लगा है और उसी से ये पता चला की इनका चिकित्सालय दाऊदपुर, काली मंदिर के पास स्थित है। डॉक्टर यादव ने बताया कि अक्टूबर 2016 से लगातार अनुपस्थित चल रहे डॉ0 वी0 के0 चौधरी साधारण एम0डी0 (फिजीशियन) हैं और इनके पास न्यूरोफिजीशियन की कोई डिग्री नहीं है और न ही वह बोर्ड पर लिखी विशेषज्ञता ही रखते है। ऐसे में वह केवल मरीजों को भ्रमित कर रहे हैं । उन्होंने कहा कि कोई भी चिकित्सक सरकारी सेवा में रहते हुए प्राइवेट प्रैक्टिस नहीं कर सकता । आगे की कार्रवाई के बारे में पूछे जाने पर डॉ0 यादव ने बताया कि इनके खिलाफ समुचित कार्रवाई के लिए शासन को पत्र लिखा जा चुका है। वही जब डॉ0 चौधरी का पक्ष जानने के लिए उनके मोबाइल नंबर 7497954091 पर संपर्क किया गया तो उधर से किसी महिला ने कॉल रिसीव करते हुए बताया कि डॉक्टर साहब अपना मोबाइल घर पर ही छोड़ कर गए हैं।
बहरहाल सरकारी सेवा में रहकर प्राइवेट प्रैक्टिस करना एक अलग बात है, लेकिन अगर जिला अस्पताल के एसआईसी की बात माने की एक डॉक्टर फर्जी विशेषज्ञता दिखाकर मरीजों को गुमराह कर रहा है तो यह मरीजों के साथ किसी विश्वासघात से कम नही।





