
आज पुस्तक मेले में भारी संख्या में लोग शामिल हुए जिसमें के के दूबे अपने साथ भारी संख्या में पुस्तकें देने की बात कही । बार के महामंत्री विजय कुमार पाण्डेय ने बताया कि पूर्व महामंत्री डी एस तिवारी ने 21 हजार, आर चंद्रा ने 25 हजार, पारिजात बेलोरा ने 11 हजार, मेजर आर डी सिंह ने 25 हजार, वी पी एस वत्स 21 हजार, उपाध्यक्ष बी पी सिंह ने 5 हजार, कर्नल पी एन चतुर्वेदी ने7 हजार, डा. चेत नारायण सिंह ने 21 हजार और विजय पाण्डेय ने 27 हजार की पुस्तकें दान की जो कि बहुत ही सराहनीय है।
आज पूर्व महामंत्री डी एस तिवारी, शमशाद आलम और कौशिक चटर्जी का आज बार ने स्वागत किया गया और इनके सहयोग को बार के लिए मील का पत्थर माना जायेगा ।
विजय कुमार पाण्डेय ने बताया कि किसी भी नवीन पहल की सफलता उसकी स्वीकार्यता से तय होती है और इस पुस्तक मेले के पीछे कार्य करने वाली विचारधारा कि पुस्तकों को नष्ट होने से बचाने का दायित्व समाज का है और उसमें उसे बढ़कर हिस्सा लेना चाहिए और लोगों की सहभागिता से इसकी सफलता तय हो गईं।
विजय पाण्डेय ने मीडिया को धन्यवाद देते हुए कहा कि आपके सहयोग से यह अभियान लोगों तक पहुंचा और लोग उसमें शामिल हुए, भविष्य में आपका सहयोग बना रहेगा बार को पूरी उम्मीद है।
पूर्व महामंत्री डी एस तिवारी ने कहा कि पुस्तकों की सार्थकता और उसको लोगों तक पहुंचाने का कार्य इस पुस्तक दान मेले ने सफलता के साथ किया । तिवारी ने आगे कहा कि जहां तक मेरी जानकारी है इस बार ने स्वयं के प्रयास से आने वाली पीढ़ियों के लिए पुस्तकों की व्यवस्था की है जो कि अनूठी पहल है।
संयक्त सचिव पी के शुक्ला ने कहा कि लाइब्रेरी की उच्चता ही किसी संस्थान की उपयोगिता को सिद्ध करता है । पूर्व कोषाध्यक्ष आर चंद्रा ने कहा कि हमारे महामंत्री का यह प्रयास अधिवक्ताओं के लिए काफी लाभदायक होगा और समाज का हर वर्ग इसका लाभ उठा सकता है । चंद्रा ने बताया कि महामंत्री विजय पाण्डेय की इच्छाशक्ति और अटल इरादों की वजह से इतनी भारी मात्रा में पुस्तकें आ सकी हैं। मौके पर अनुराग मिश्रा, वी पी पाण्डेय, विपिन सिंह, कविता मिश्रा, विनय पाण्डेय, आर डी सिंह और पी एन चतुर्वेदी इत्यादि अधिवक्ता मौजूद थे।
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