Wednesday, March 11, 2026
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पक्के बिल जारी करने में छूट रहे पसीने

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PANCHDEV YADAV 
जीएसटी से व्यापारी खुश ग्राहक परेशान
▷ जागरूता के अभाव में लुटा जा रहा उपभोक्ता
▷ अब तक 90 प्रतिषत व्यापारी नहीं करा पाये पंजीकरण
▷ पक्के बिल जारी करने में छूट रहे पसीने
मलिहाबाद,लखनऊ| 1 जुलाई से भले ही जीएसटी कानून लागू हो गया हो परन्तु ग्रामीण बाजारों में अब तक इसका असर नहीं दिख रहा है। तहसील क्षेत्र के मलिहाबाद,माल,रहीमाबाद कस्बों में अभी व्यापारी जीएसटी को पूरी तरह से समझ ही नहीं पाये हैं। प्रदेश सरकार द्वारा शहरों में भले ही कार्यशालाएं आयोजित कर व्यापारियों को जानकारी दे दी गयी हो परन्तु गा्रमीण बाजार अभी जीएसटी से प्रावधानों के अनुसार संचालित नहीं हो पाये हैं।
   मलिहाबाद कस्बे के लगभग 200 व्यापारी तथा माल कस्बे से 150 व्यापारी अब भी बिना पक्के बिल दिये ग्राहकों को मनमाने दामों पर सामान बेंच रहे हैं जिससे ग्राहकों की जेब कट रही है। अब तक मुश्किल से 10 प्रतिशत ही व्यापारियों ने जीएसटी के अन्तर्गत पंजीकरण कराया है शेष 90 प्रतिशत व्यापारी मनमाने ढंग से व्यापार कर रहे हैं। इसी उहापोह के चलते इन व्यापारियों ने पक्के बिल न छपवाकर ग्राहकों द्वारा मांगने पर कच्चे बिल थमा रहे हैं जिससे सरकारी राजस्व को बड़े पैमाने पर चूना लग रहा है। रेडीमेड गारमेन्ट तथा कपड़ा व्यापारी एवं किराना व्यापारी,सर्राफा व्यवसायी तथा दवा व्यवसायी प्रिंट रेट से ज्यादा दाम वसूल रहे हैं।
   इस स्थितियों में सबसे खराब हालत दवा खरीदने वाले मरीजों और तीमारदारों की है केन्द्र सरकार द्वारा अचानक 120 जीवन रक्षक दवाओं के दाम बढ़ा दिये जाने से गंभीर रोगियों की जान पर बन आयी है उनकी पुकार सुनने वाला कोई नहीं है। सरकार राजस्व बटोरने में लगी हुई है वहीं गरीब मरीज बेमौत काल के गाल में समा रहा है।
    आमजन में चर्चा है कि सरकार ने पेट्रोल,डीजल,शराब रियल स्टेट कारोबार को जीएसटी से बाहर रखकर जनता से क्रूर मजाक किया है अब आम जनता भी जानती है कि अब तक पेट्रोल बिक्री पर 57 प्रतिशत टैक्स लिया जा रहा है। यदि इसे जीएसटी के अन्तर्गत लाया गया होता तो 24 प्रतिशत टैक्स लगने से पेट्रोल 70 रूपये प्रतिलीटर के बजाय 40 रूपये लीटर में बिकने लगता जिससे आम उपभोक्ता को राहत मिलती। वहीं सर्राफा व्यवसायी ग्राहकों से बढ़ी दरों पर दाम वसूल रहे हैं वो भी बिना पक्की रशीद दिये बिना। कुल मिलाकर आम ग्राहक पहले से ज्यादा परेशान है वहीं व्यापारी अपनी जेबें भरने में लगे हैं इस तरफ किसी का भी ध्यान नहीं जा रहा है। जब तक सरकार का ध्यान इधर जायेगा तब व्यापारी करोड़ों रूपये कमाकर मालमाल हो जायेंगे|
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