BRIJENDRA BAHADUR MAURYA
“स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है” नारे की शताब्दी मनाए यूपी सरकार : नाईक

लखनऊ। लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक देश के स्वतंत्रता संग्राम के महासेनानी थे जिन्होंने देश की आजादी के लिए जन जागरण द्वारा चेतना का निर्माण किया। बाल गंगाधर तिलक ने वैचारिक जागृति के लिए ‘केसरी’ और ‘मराठा’ जैसे समाचार पत्र प्रकाशित कर के अपने अग्रलेखों के माध्यम से लोगों को जागरूक करने का काम किया। उन्होंने महाराष्ट्र में गणेश उत्सव और शिवाजी उत्सव जैसे आयोजनों को सामूहिक रूप से आयोजन करने को बढ़ावा देकर देशवासियों को सामाजिक व सांस्कृतिक रूप से एक सूत्र में बांधने का सफल प्रयास किया। बाल गंगाधर तिलक ने आजादी के लिए कहा था कि ‘स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है और मैं उसे लेकर रहूंगा’।
राज्यपाल राम नाईक ने मंगलवार को लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक की पुण्य तिथि के अवसर पर लखनऊ के लालबाग चौराहे पर स्थापित उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं श्रद्धांजलि अर्पित करने के बाद ये विचार व्यक्त किये। श्रद्धांजलि सभा में उदय खत्री, सुधीर हलवासिया सहित अन्य नागरिकजन उपस्थित थे।
नाईक ने कहा कि बाल गंगाधर तिलक ने लखनऊ में 1916 में ‘स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है और मैं उसे लेकर रहूंगा’ का नारा दिया था। इस नारे को 2017 में 101 वर्ष हो रहे हैं। उन्होंने पूर्व की सरकार को सुझाव दिया था कि उक्त अधिवेशन को 100 वर्ष पूरे होने पर राज्य सरकार द्वारा ऐसा आयोजन होना चाहिए जिससे लोकमान्य बाल गंगाधर की भूमिका सबके सामने आए जो किन्ही कारण से सम्भव नहीं हो पाया था। उन्होंने कहा कि इस वर्ष भव्य आयोजन करने के लिए वे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से चर्चा करेंगे।
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