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मुंह छिपाकर क्यों बनाया Aashiqui का पोस्टर? समीर अंजान ने 36 साल बाद खोला फिल्म की महासफलता का राज

समीर अंजान ने फिल्म आशिकी की महासफलता का राज खोला, बताया कि कैसे यह पहले एक संगीत एल्बम के रूप में शुरू हुई थी।

आशिकी (Aashiqui) फिल्म मेरे लिए सिर्फ एक फिल्म नहीं मेरे करियर का माइल स्टोन है। अगर मैं ये कहूं कि जो आशिकी फिल्म का म्यूजिक है वो एक रिकॉर्ड है और मेरे ख्याल से बहुत मुश्किल है उस रिकॉर्ड को क्रॉस करना किसी के लिए। ऐसा मैं इसलिए कह रहा हूं क्योंकि वो एक दौर था और एक अच्छा दौर था जब गीत संगीत को उतना महत्व दिया जाता था। गीत संगीत को लोग फिल्मों की कहानी के इर्द-गिर्द ही बनाते थे।

खास तौर से मैं आज आशिकी पे बात कर रहा हूं तो मैं बताना चाहता हूं कि दरअसल आशिकी कोई फिल्म थी ही नहीं पहले। एक अल्बम बनाने की बात चली जब अनुराधा पौडवाल जी नदीम श्रवण का गाना गाने आईं। उन्होंने गाना सुना और उनको गाना बड़ा पसंद आया तो उन्होंने कहा कि आप लोग गुलशन जी से क्यों नहीं मिलते। तो उन्होंने कहा कि दीदी हम लोग तो गुलशन जी तक पहुंचना हमारा मुश्किल है क्योंकि हम उनको जानते नहीं और हम लोग नए लोग हैं तो शायद हम से वो मिलेंगे भी नहीं।

अनुराधा पौडवाल ने करवाई थी मुलाकात

इस पर अनुराधा पौडवाल ने कहा कि कोई बात नहीं मैं आपको मिलवाती हूं। एक दिन फिक्स हुआ और हम उनसे मिले। हम लोग मिले तो गुलशन जी ने कहा कि देखो भाई हम फिल्म तो कोई बना नहीं रहे हैं। हम प्राइवेट अल्बम जरूर कर रहे हैं और हमारा एक एल्बम बहुत चल गया है ‘लाल दुपट्टा मलमल का’ सो आप लोग उसी तरह कोई एक कोई एक एल्बम बनाइए। तो वहीं सब बैठे हुए थे वहीं एल्बम बनाने का प्लान फिक्स हुआ।

और आशिकी जो है एक एल्बम के रूप में बनाने की बात फिक्स हो गई कि चलो भाई हम एक एल्बम करते हैं। उस एल्बम का वहीं नाम डिसाइड हुआ कि इसका नाम रखेंगे ‘चाहत’। हमने पहला गाना ‘मैं दुनिया भुला दूंगा तेरी चाहत में’ बनाया और वहां से कहानी शुरू हुई। तब उस वक्त गुलशन कुमार जी एक म्यूजिक बैंक बना रहे थे कि उनके पास जो भी नए प्रोड्यूसर्स आए, बोले कि सर हमारे पास एक म्यूजिक बैंक है आप सुन लीजिए तो आप हमसे म्यूजिक ले लीजिए और वही म्यूजिक मैं आपका खरीद भी लूंगा।

महेश भट्ट ने रखा था फिल्म बनाने का प्रस्ताव

हमारे पास रेडी म्यूजिक है मैं आपको दे दूंगा। संयोगवश एक दिन महेश जी घूमते हुए आए, हम लोग चाहत के तीन गाने रिकॉर्ड कर चुके थे और वही गाने उनको सुना दिए। तो महेश जी इतने इंस्पायर हुए कि उन्होंने बोला गुलशन जी ये गाने मेरे हो गए और अब मैं कहानी लिखूंगा इन गानों के इर्द-गिर्द। ये पहली बार हुआ कि गानों को सुनके एक डायरेक्टर इंस्पायर हो के एक फिल्म क्रिएट करने की बात करने लगा।

उन्होंने ये पिक्चर का टाइटल रख दिया ‘आशिकी’। फिर उन्होंने बाद में हम लोगों को बुलवाया और पूरी कहानी सुनाई कि भाई देखो ये कहानी है और मैं ये चाहता हूं। फिर हम लोगों ने काम शुरू किया। इसके बाद आशिकी का टाइटल सॉन्ग ‘सांसों की जरूरत है जैसे’बना। फिर हमने एक-एक करके सारे गाने रिकॉर्ड किए और म्यूजिक का काम खत्म हुआ।

डिस्ट्रीब्यूटर की बातों से डर गए थे गुलशन कुमार

अब वो पिक्चर का जब पहला ट्रायल हुआ तो डिस्ट्रीब्यूटर लोगों ने कहा कि यार ये म्यूजिक जो है ये फिल्म का म्यूजिक नहीं लग रहा है ये अल्बम का म्यूजिक लगता है। दूसरी प्रॉब्लम ये है कि इस म्यूजिक में ये जो दो एक्टर एक्ट्रेस हैं ये देखने में अच्छे नहीं हैं। इनके साथ बात बनेगी नहीं। खैर तो मुझे फोन आया गुलशन जी का कि भैया ऐसा लग रहा है तो अभी मैं पिक्चर इसको खत्म करता हूं।

अब हम इसको बनाएंगे क्या बोलते हैं केवल प्राइवेट एल्बम्स करके रिलीज करेंगे। अच्छा भाई ठीक है मैंने फोन किया महेश जी महेश जी बोले अरे पागल हो गया ऐसे कैसे होगा मैं नदीम श्रवण और हम लोग गए तो उन्होंने कहा कि एक काम करते हैं उन्होंने गुलशन जी से कहा कि क्यों आपको ऐसा लग रहा है? इस पर गुलशन जी बोले कि हमारे डिस्ट्रीब्यूटरों का ये रिस्पांस आया है तो उन्होंने बोला देखिए मैं आपको एक बात की गारंटी दे सकता हूं कि ये म्यूजिक आपकी फिल्म का नहीं इस सदी का सबसे बड़ा म्यूजिक होगा।

महेश भट्ट ने साइन किया था ब्लैंक पेपर

अब आप बोलिए वो तो उसको लगा कि यार इतना बड़ा डायरेक्टर इतनी बड़ी गारंटी देने के लिए तैयार है तो उन्होंने कहा कि अब एक काम करेंगे अगर आपको इतना भरोसा है तो आप ब्लैंक पेपर पे लिखेंगे तो महेश जी ने ब्लैंक पेपर पे लिख दिया। अब वो भी गुलशन जी क्या है गुलशन जी का विजन बड़ा कमाल का था उनको लगा कि यार एक आदमी इतनी बड़ी बात कह रहा है डायरेक्टर कि मैं डायरेक्शन छोड़ दूंगा अगर ये म्यूजिक नहीं चला तो उन्होंने बोला ठीक है गुलशन जी अगर ये बात हुई तो चलो अब आज से मैं आपको एक बात बताता हूं कि मैं इस पिक्चर का इतना बड़ा प्रमोशन करूंगा जो आज तक नहीं हुआ।

क्यों नहीं दिखाया लड़का-लड़की का चेहरा

अच्छा बोले फिर ये तो हो गया सर। अब ये लड़का लड़की का क्या करेंगे? बोले उसका भी एक रास्ता मेरे पास है आप एक काम करिए मैं एक ऐसा पोस्टर क्रिएट करूंगा जिसमें शुरू में लड़के लड़की का मुंह दिखाओ ही मत। उसके ऊपर मैं कोड डाल देता हूं और जब म्यूजिक इसका सुपरहिट हो जाएगा तो पिक्चर रिलीज करेंगे तो लड़का लड़की कैसे भी दिखें वो पिक्चर हिट हो जाएगी। इस बात को लेकर गुलशन जी माने फिर प्रमोशन शुरू हुआ और ऐसा जबरदस्त उन्होंने प्रमोशन किया कि जिस गली जिस नुक्कड़ जिस कोने में गए यही म्यूजिक सुनाई देने लगा और ऐसा लगा कि जैसे पूरे म्यूजिक का सिनारियो चेंज हो गया उसकी पूरी दुनिया बदल गई।

रातों-रात नदीम श्रवण हम लोग स्टार हो गए और इतनी फिल्में मिलनी शुरू हो गईं। वो फिल्म हो गई इतनी बड़ी हिट मगर ये बात कॉमन आदमी को पता ही नहीं बेचारे। उनको पता क्या पता कि क्या हुआ फिल्म के साथ उनको तो भाई पिक्चर सुपरहिट हो गई उनके गाने आज भी लोग गुनगुनाते हैं और हम लोग जब जाते थे फिल्म देखने तो मैंने कितनी बार देखा कि लोग फिल्म देखने आते थे और जैसे ही गाना खत्म होता था बाहर चले जाते थे वे चाय पीते थे घूमते थे। उनको करेक्ट अंदाजा होता था कितने बजे अब गाना आएगा फिर सब लोग वहां से गाना देखने अंदर आ जाते थे।

आज के लोग नहीं समझते म्यूजिक

तो इस तरह से तो फिल्म आशिकी बनी और उसका म्यूजिक जो है हिस्टोरिकल बना मगर एक बात मैं आप लोगों को बताना चाहता हूं कि ये जो कुछ भी हुआ ये इस बात की किसी को 100% गारंटी नहीं थी कि आशिकी का कुछ इतना बड़ा इतिहास बन जाएगा। मगर चीजें ऐसे ही बनती हैं और बनते बनते बनती हैं और कई बार ऐसा हुआ बाद में भी फिल्मों के साथ अब दुखद ये है कि अब चूंकि म्यूजिक के इंपॉर्टेंस को लोग भूल गए हैं। लोगों को समझ में नहीं आ रहा कि 90 के दौर की फिल्में जो थीं कोई भी फिल्म ऐसी नहीं थी जिसको आप बोल सकते हैं कि आउटस्टैंडिंग फिल्म थी। उनके म्यूजिक ने उन फिल्मों को चलाया नए-नए चेहरों को लेकर ‘फूल और कांटे’ ले लीजिए ‘आशिकी’ ले लीजिए ‘कयामत से कयामत तक’ ले लीजिए इसमें कोई बड़े स्टार नहीं थे।

इन स्टारों को म्यूजिक ने स्टार बनाया तो कहीं ना कहीं अब काम करने में यही तकलीफ हो रही है कि अब लोग म्यूजिक समझते नहीं या म्यूजिक को प्रॉपर समझाया नहीं जाता तो प्रॉब्लम हो रही है और मुझे मालूम है कि ये बदलाव का दौर है सिनेमा बदल गया चीजें बदल गई मगर एक बात मैं आपको हमेशा बोलूंगा हिंदुस्तान संगीत की जमीन है और वो संगीत जो है वो कभी भी मर नहीं सकता। वो बदलाव होगा चीजें थोड़ी बहुत 19-20 होती रहेंगी मगर म्यूजिक जिंदा रहेगा।

आने वाली पीढ़ी को क्या लेना चाहिए सीख?

अभी ये कुछ खराब म्यूजिक का दौर चल रहा है। फिर आएगा अच्छा तो अच्छा काम करते रहना ही हमारा सबसे बड़ा सर्वाइवल है। हमको अच्छा काम करते रहना चाहिए और आशिकी फिल्म से आने वाली पीढ़ी को सीख लेनी चाहिए आने वाली फिल्मों से कुछ सीखना चाहिए कि किस तरह से और उसके लिए मैं बहुत ज्यादा क्रेडिट दे रहा हूं दो और लोगों को एक है नदीम श्रवण और एक है महेश भट्ट। महेश भट्ट जी को म्यूजिक का कमाल का सेंस है वो पोएट्री को बहुत गहराई से समझते हैं। उनको कम से कम हजारों शेर याद होंगे बैठते हैं तो इतनी शेरो शायरी का माहौल बन जाता है कि पूछो मत।

आम आदमी की भावनाओं से जुड़ना जरूरी

नदीम श्रवण को तो आप सबने उनके गाने सुने हैं। तो जो मेलोडी और जिस तरह से पोएट्री का संगम करके उन्होंने एक नया रंग इंडस्ट्री को दिया है। आज भी 90 के दौर का म्यूजिक लोग मिस करते हैं और 90 के दौर में मेरे खयाल से अगर सबसे ज्यादा क्रेडिट किसी कंपोजर को जाना चाहिए तो वो हैं नदीम श्रवण और उन्होंने इस बात को प्रूव किया है। तो ये नई पीढ़ी जिसको हम जेन जी कहते हैं इनको ये बात समझनी पड़ेगी कि हिंदुस्तानी म्यूजिक जो है वो आम आदमी का म्यूजिक होता है। अगर आप आम आदमी को टच नहीं करेंगे उसकी भावनाओं को नहीं छूएंगे तो वो म्यूजिक लॉन्ग लास्टिंग हो ही नहीं सकता।

दूसरी चीज है कि जब आशिकी बनी थी तो इतनी ज्यादा दुनिया डिजिटल नहीं हुई थी तब दुनिया भर का म्यूजिक था नहीं। अब दुनिया भर का म्यूजिक आ गया है पूरी दुनिया जो है वो डिजिटलाइज हो गई है तो उसमें अब ऐसी उम्मीद रखना कि फिर आशिकी बनेगी और वही वो मुमकिन नहीं है। मगर ऐसा नहीं है अब आशिकी नहीं बनेगी तो मौसीकी बन जाएगी। कोई ना कोई बन जाएगी और उसके बाद आशिकी 2 भी बनी चीजें हुई मगर अब कहीं ना कहीं बदलाव को लोग महसूस कर रहे हैं। लोगों को लग रहा है कि नहीं फिर अच्छे म्यूजिक की तरफ मुड़ना पड़ेगा तो ये जो मेरा अनुभव रहा है गानों का और जिस तरह से आशिकी को मैंने जिया है।

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