ग्रीनपीस जर्मनी की नीना नोएल ने कहा, “पिछले सप्ताह की तुलना में यह बेहद बड़ी बढ़ोतरी है।” उन्होंने कहा कि इससे साफ है कि बड़ी मात्रा में कच्चा तेल रिस रहा है। पिछले सप्ताह तेल फैलाव का क्षेत्रफल करीब 20 वर्ग किलोमीटर आंका गया था। हालांकि, रिसाव अचानक इतना बढ़ने की वजह स्पष्ट नहीं है।
जहाज से भेजी गई थी धमाके की जानकारी
संघर्ष और पर्यावरण पर काम करने वाले नीदरलैंड के संगठन पैक्स के पर्यावरण विशेषज्ञ विम ज्वाइनेनबर्ग ने कहा कि समुद्र की सतह पर दिख रही तेल की परत काफी पतली है, जो कच्चे तेल के प्रकार और मौसम के अनुसार वाष्पित भी हो सकती है। हालांकि, उन्होंने बताया कि द्वीप के दक्षिणी और पश्चिमी तटों तक गाढ़े काले रंग का तेल भी पहुंच चुका है।
ज्वाइनेनबर्ग के अनुसार, तेल की परत अब करीब 90 किलोमीटर तक फैल गई है, जो एक सप्ताह पहले की तुलना में लगभग दोगुनी है। उन्होंने अनुमान लगाया कि टैंकर में 8 लाख बैरल से अधिक कच्चा तेल मौजूद था। दो समुद्री और शिपिंग समाचार माध्यमों के अनुसार, यह टैंकर जून से ओमान के तट पर फंसा हुआ है। उनकी रिपोर्ट में कहा गया कि उस समय चालक दल ने जहाज पर विस्फोट होने की जानकारी दी थी। हालांकि, एपी इन रिपोर्टों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं कर सका।
ब्रिटेन ने क्यों लगाया था तेल पर प्रतिबंध?
ब्रिटेन सरकार ने टैंकर पर प्रतिबंध लगाने के फैसले में कहा था कि यह जहाज “ऐसी गतिविधियों में शामिल रहा है या शामिल होने की संभावना है, जिनका उद्देश्य या प्रभाव यूक्रेन को अस्थिर करना या रूसी सरकार का समर्थन करना है।” कैमरून के झंडे वाले इस टैंकर पर यूरोपीय संघ, कनाडा और स्विट्जरलैंड ने भी प्रतिबंध लगाए हैं।
भू-स्थानिक आंकड़ों पर नजर रखने वाली कंपनी सिनमैक्स मैरीटाइम ने पहले एक्स पर बताया था कि उसे मई में ऐसी तस्वीरें मिली थीं, जिनमें यह टैंकर अपनी हालिया यात्रा से पहले रूस के काला सागर स्थित नोवोरोसिस्क बंदरगाह पर दिखाई दिया था। ग्रीनपीस जर्मनी ने अपने बयान में कहा, “तेल फैलाव का यह नाटकीय विस्तार फंसे हुए टैंकर से पर्यावरण को लगातार बने गंभीर खतरे को दिखाता है। साथ ही यह रूस के तथाकथित ‘शैडो फ्लीट’ से जुड़े तौर-तरीकों के खतरों का भी उदाहरण है।”





