इल्म-ओ-दानिश लाइब्रेरी, लखनऊ ने पेश की ताज़ियत व तबरीक
नई दिल्ली: पवित्र रमज़ान के महीने में अमेरिका और इज़राइल की कथित बर्बरता के कारण इस्लामी गणराज्य ईरान में अत्याचार हुए, जिनमें रहबर-ए-शहीद, दुनिया के मज़लूमों की उम्मीद हज़रत आयतुल्लाह सैयद अली हुसैनी ख़ामेनई समेत बेगुनाह बच्चों, आम नागरिकों और उच्च अधिकारियों और बुधजीवियों की शहादत की खबरों ने गहरा असर डाला। दुनिया भर में न्यायप्रिय और इंसाफ पसंद लोगों ने, धर्म और समुदाय से ऊपर उठकर, अपने ग़म और ग़ुस्से का इज़हार किया, जो अब भी जारी है।
उल्लेखनीय है कि इस घटना के बाद पूरे भारत में ताज़ियती सभाओं, मजलिसों और कैंडल मार्च का सिलसिला लगातार चल रहा है। बड़ी संख्या में शिया, सुन्नी, हिंदू, सिख और ईसाई समुदाय के लोग ईरानी जनता के साथ एकजुटता व्यक्त करने और रहबर-ए-शहीद के प्रति अपनी श्रद्धा प्रकट करने के लिए भारत में मौजूद वली-ए-फ़क़ीह के प्रतिनिधि डॉ. अब्दुल मजीद हकीम इलाही से मुलाकात कर रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार, रोज़ाना हज़ारों की संख्या में महिलाएं और पुरुष, छोटे-बड़े, उलेमा, बुद्धिजीवी, शायर और लेखक अपनी उपस्थिति दर्ज कराते हुए संवेदना व्यक्त कर रहे हैं। बीते दिन इल्म-ओ-दानिश लाइब्रेरी के निदेशक मौलाना सैयद हैदर अब्बास रिज़वी ने नई दिल्ली स्थित ईरान कल्चर हाउस पहुंचकर रहबर-ए-शहीद और अन्य शहीदों, जिनमें मासूम बच्चे भी शामिल हैं, के प्रति गहरा शोक और आक्रोश व्यक्त किया।
इस अवसर पर उन्होंने इस्लामी व्यवस्था और वर्तमान वली-ए-फ़क़ीह हज़रत आयतुल्लाह सैयद मुजतबा ख़ामेनई के प्रति अपने समर्थन और प्रतिबद्धता को दोहराया। मौलाना रिज़वी ने भारतीय जनता की ओर से डॉ. हकीम इलाही का आभार व्यक्त किया कि वे विभिन्न शहरों, राज्यों और गांवों का कठिन सफर तय कर रहे हैं।
डॉ. हकीम इलाही ने भारतीय जनता को नेक और शरीफ बताते हुए कहा कि रहबर की शहादत ने जिस तरह की एकता और भाईचारे का माहौल बनाया है, वह अभूतपूर्व है। उन्होंने भारतीय उलेमा की सराहना करते हुए कहा कि वे व्यक्तिगत रूप से सभी का धन्यवाद करते हैं, जिन्होंने इस्लाम और क्रांति की शिक्षाओं के प्रचार-प्रसार में कोई कसर नहीं छोड़ी।
उन्होंने खुत्बा देने वालों, शायरों, ज़ाकिरों और प्रचारकों से अपील की कि वे विवादित मुद्दों से बचें और संतुलित भाषा का प्रयोग करें। साथ ही उन्होंने कहा कि “तव्वली और तब्बरी” हमारे महत्वपूर्ण विश्वासों में शामिल हैं, लेकिन संवाद की शालीनता और महान धार्मिक नेताओं की सलाह को ध्यान में रखना बेहद ज़रूरी है।
इस मुलाकात में मौलाना सैयद हैदर अब्बास रिज़वी के अलावा अल-मोमिन कल्चरल फाउंडेशन के मौलाना एहतेशामुल हसन, जामिया हैदरीया खैराबाद के प्रवक्ता मौलाना मिनहाल रज़ा, गाजीपुर के इमाम-ए-जुमा मौलाना तनवीर हैदर, मौलाना सैयद अलमदार हुसैन और मौलाना सैयद मिनहाल हैदर सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे, जिन्होंने ईरान कल्चर हाउस, दिल्ली पहुंचकर अपनी संवेदनाएं व्यक्त कीं।





