गोरखपुर । सौतेली मां के कठोर वचनों ने बालक ध्रुव के मन को झकझोर कर रख दिया। उसकी माता सुनीति के बहुत समझाने पर भी उसका हृदय शांत नहीं हुआ । भगवान् को प्राप्त करने के लिए अकेले जंगल में आधी रात को निकल गया। उक्त बातें अयोध्या धाम से पधारे आचार्य विद्याधर भारद्वाज ने कही । वह घघसरा नगर पंचायत के वार्ड संख्या 14 हनुमंत नगर में श्रीमद् भागवत कथा व्यास पीठ से चौथे दिन श्रद्धालुओं को कथा रसपान कर रहे थे। उन्होंने कहा कि- माता सुनीति के बहुत समझाने पर भी बालक ध्रुव का मन शांत नहीं हुआ और आधी रात को चुपके से उठकर जंगल की तरफ तपस्या करने चला गया ।
शास्त्री ने कहा कि- बालक का मन शीशे की तरह साफ और फूल की तरह कोमल होता है। ध्रुव के मन पर सौतेली माता का अपमान इस कदर हावी हो गया था कि- उसे मौत से भी डर नहीं लगा। छ: महीने की कठोर तपस्या से भगवान ने उसके सभी मनोरथ पूर्ण कर दिये। पुनः घर लौटने पर सौतेली माता सुरूचि समेत सभी प्रजा जनों ने ने उसका भव्य स्वागत किया । आगे चलकर अपनी माता सुनीति के साथ विमान में बैठकर सशरीर बैकुंठ धाम चला गया। महात्मा ध्रुव का इतिहास शास्त्रों में स्वर्णिम अक्षरों में लिखा गया है। के अवसर पर मुख्य यजमान घनश्याम का साधन तथा उनकी पत्नी लाखों देवी,राधेश्याम, सूरज, अशोक, अर्जुन, कन्हैया, अरविंद, मनीष कसौधन, राजू कृत नारायण त्रिपाठी ,छोटे कसौधन, डल्लू कसौधन, हरिराम कसौधन समेत भारी संख्या में लोग मौजूद थे।





