इटावा। मंगलवार को 1108 मृत्युंजय मां पीतांबरा महायज्ञ परिसर में पिछले आठ महीनों से अखंड रूप से प्रज्वलित पवित्र धूना और प्रधान कुंड से भक्तों को भभूति प्रदान की गई।यह वही धूना है जिसकी तपन,सुगंध और दिव्य ऊर्जा ने पूरे आयोजन काल में नगर की आध्यात्मिक चेतना को जागृत रखा।
पूज्य यज्ञाधीश श्री रामदास जी महाराज ने कहा कि धूना से प्राप्त भभूति को सनातन परंपरा में अत्यंत पवित्र,कल्याणकारी और रक्षक माना गया है-यह साधक के मन को स्थिर करती है,नकारात्मकता का शमन करती है और शरीर-चेतना में शांति व ऊर्जा का संचार करती है।इसी प्रकार प्रधान कुंड की भभूति,जिसमें करोड़ों मंत्र-आहुतियों का दिव्य प्रभाव समाहित है,आशीर्वाद का वह स्वरूप है जिसे पाना अपने आप में एक अद्भुत सौभाग्य माना जाता है।
पिछली रात्रि विशाल भंडारे के पश्चात परंपरा के अनुसार विसर्जन का पावन कार्यक्रम सम्पन्न हुआ।यज्ञशाला में प्रतिष्ठित माई-बाबा,मुख्य यजमान राधा वल्लभ सरकार तथा सभी देवताओं को विधि-विधान से सम्मानपूर्वक विदा किया गया। यह विदाई केवल एक अनुष्ठान का समापन नहीं,बल्कि उस दिव्य ऊर्जा को सार्थक रूप से लोककल्याण के लिए समर्पित करने का प्रतीक है।
वितरित की गई भभूति इस समूची आध्यात्मिक यात्रा का सार लिए हुए प्रत्येक श्रद्धालु के लिए एक अमूल्य प्रसाद है-यज्ञ की दिव्य अग्नि का स्पर्श,मंत्रों की तरंगों का आशीष, और इष्टिकापुरी में आठ महीनों से लगातार प्रवाहित हो रही पुण्य ऊर्जा का संक्षिप्त रूप।यह भभूति केवल एक चिन्ह नहीं, बल्कि इस महायज्ञ की स्मृति,शक्ति और संकल्प को अपने जीवन में धारण करने का माध्यम है।इस प्रकार मंगलवार को दिन इष्टिकापुरी के महायज्ञ इतिहास में एक और पवित्र अध्याय जोड़ गया,जहाँ भक्तों ने न केवल प्रसाद ग्रहण किया, बल्कि एक दिव्य अनुप्रेरणा को अपने जीवन में उतारा।





