खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन के उपायुक्त ग्रेड सेकंड का तबादला हुआ प्रयागराज, भ्रष्टाचार में डूबे फूड इंस्पेक्टरों के कारनामों पर लगेगा विराम, छापे के नाम सिर्फ होती थी अवैध वसूली

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अलीगढ़। प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जो कहते हैं वह कर दिखाते हैं। उनका साफ निर्देश है कि भ्रष्टाचार किसी भी कीमत पर बर्दाश नहीं किया जाएगा। अभी 2 साल पूरे भी नहीं कर पाए थे कि फूड विभाग के मुखिया डॉ दीनानाथ यादव का तबादला प्रयागराज हो गया। सबसे मजे की बात यह है कि 2 साल के कार्यकाल में यादव अपने अधीनस्थ फूड इंस्पेक्टरों पर भी लगाम नहीं कस पाए थे जिस कारण फूड इंस्पेक्टर द्वारा मिलावट खोरों के खिलाफ अभियान तो चलते परंतु सेंपल ऐसी वस्तु का लिया जाता जिसमें मिलावट नहीं आए। इसके बदले 10 हजार रूपए से लेकर 20 हजार रूपए तक की वसूली की जाती थी। वही यादव आए दिन कार्यालय से नदारद रहते थे। जानकारी करने पर पता चलता था कि वह लखनऊ मीटिंग में गए है।

फूड विभाग के मुखिया का यह आलम था कि न किसी से दोस्ती न किसी से बैर। जो खेल करते थे उनके अधीनस्थ कर्मचारी खुद करते थे। जबकि 2 साल के अंदर सैकड़ों छापे तो मारे गए जिनकी रिपोर्ट या तो प्रेसर में या भ्रष्टाचार के बल पर पास होकर आती थी। जिसमें ताजा उदाहरण सेल खड़ी मिलावट युक्त आटा तालानगरी में पकड़ा गया था। जिसकी जांच स्टेट लेवल पर फैल आई और सेंट्रल लेवल पर पास हो गई। तबी जुबान बात सामने आई कि ताला नगरी में मिलावट युक्त आटे का जो मील था उसका मालिक कलेक्ट्रेट का पूर्व असला बाबू था। जिसका कि रिकॉर्ड धन बल और भ्रष्टाचार में कायम रहा इसी के बल पर उसके आटे का सैंपल पास हो गया। यह जांच का विषय है कि सेल खड़ी युक्त मिलावटी आटा जो स्वास्थ के लिए गंभीर खतरा पैदा करता हैं उसका सैंपल किस आधार पर सेंट्रल लेवल से पास हुआ।

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