अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 के अंतर्गत प्रवेश देने से किया मना
गोरखपुर। प्राइवेट स्कूल लगातार मनमानी पर उतारू हैं। ऐसे स्कूल सरकारी नियमों के अधीन नही बल्कि अपने बनाये नियम कानून से चलते हैं। मामला फीस का हो, कॉपी किताब ड्रेस का हो या फिर स्कूल में बच्चों के लिए बिजली पानी और अन्य इंफ्रास्ट्रक्चर जैसी बुनियादी सुविधाओं की सुचारू उपलब्धता का हो, हर जगह स्कूल प्रबंधन द्वारा सरकार के आदेश को लगातार रद्दी की टोकरी में डाल दिया जा रहा है।
ताज़ा मामला मियांबाज़ार (दक्षिणी) संस्कृति नर्सरी से जुड़ा हुआ है। यहां जिले के बेसिक शिक्षा अधिकारी के अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 के अंतर्गत अलाभित समूह और दुर्बल आय वर्ग के बच्चो का दाखिला करने के आदेश को ठेंगा दिखा दिया गया है। संस्कृति नर्सरी ने अलाभित वर्ग में रेयांश कुमार पुत्र नागेश्वर कुमार का एडमिशन कक्षा 1 में लेने से मना कर दिया है।
इस सम्बंध में रेयांश कुमार के पिता का कहना है कि वह बेसिक शिक्षा विभाग के चक्कर काटकर थक चुके हैं लेकिन आदेश के बावजूद उनके बच्चे का प्रवेश नही हो पा रहा है। आपको बताते चलें कि अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 के अंतर्गत सरकार ने अलाभित और दुर्बल आय वर्ग के बच्चों के लिए विभिन्न स्कूलों में संख्या निर्धारित कर दिया है, लेकिन अक्सर स्कूल प्रवेश और फीस को लेकर अपनी मनमानी करते हैं और सब कुछ जानते हुए भी जिम्मेदार अधिकारी कोई कार्यवाही नही करते जिससे ऐसे स्कूलों का मनोबल बढ़ता है।





