स्मार्टफोन पर घंटों रील्स देखने की आदत सेहत के लिए हानिकारक हो सकती है, जिससे डाइजेशन, स्किन और नींद पर बुरा असर पड़ता है।
आजकल हर किसी के हाथ में स्मार्टफोन है और खाली समय मिलते ही इंस्टाग्राम, फेसबुक या यूट्यूब पर शॉर्ट वीडियो स्क्रॉल करना हमारी एक आम आदत बन चुकी है। यह देखने में भले ही एक सिंपल टाइमपास लगे, लेकिन घंटों तक स्क्रीन पर नजरें टिकाए रखने की यह आदत आपके शरीर और दिमाग को अंदर ही अंदर नुकसान पहुंचा रही है।
जी हां, दिल्ली के पीएसआरआई अस्पताल की कंसल्टेंट साइकोलॉजिस्ट, अर्पिता कोहली के अनुसार जरूरत से ज्यादा रील्स देखना धीरे-धीरे सेहत से जुड़ी कई समस्याओं का कारण बन सकता है।
त्वचा पर असर और समय से पहले बुढ़ापा
क्या आपको अपनी त्वचा बेजान लगने लगी है? अगर हां, तो इसका एक बड़ा कारण आपकी मोबाइल स्क्रीन हो सकती है। देर रात तक रील्स देखने से हमारी नींद पूरी नहीं हो पाती है। इसके अलावा, स्क्रीन से निकलने वाली ब्लू लाइट शरीर के हार्मोनल संतुलन को बिगाड़ देती है और नींद लाने वाले हार्मोन ‘मेलाटोनिन’ के प्रोडक्शन को कम कर देती है। इसका सीधा असर हमारी त्वचा पर पड़ता है, जिससे चेहरे की चमक छिन जाती है और समय से पहले झुर्रियां भी आने लगती हैं।
पाचन से जुड़ी समस्याएं
हममें से कई लोगों को खाना खाते समय भी लगातार रील्स देखने की आदत होती है। जब हमारा ध्यान खाने के बजाय मोबाइल पर होता है, तो हमें यह पता ही नहीं चलता कि हमने कितना खा लिया है, जिससे ओवरईटिंग की आदत बढ़ जाती है। ध्यान भटकने की वजह से पाचन तंत्र ठीक से अपना काम नहीं कर पाता। लंबे समय तक यह आदत बनी रहे, तो आपको गैस, एसिडिटी और अपच जैसी पेट की समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।
नींद उड़ जाना और दिनभर की थकान
रात को सोने से ठीक पहले रील्स देखने से हमारा दिमाग शांत होने के बजाय लगातार एक्टिव बना रहता है। इस वजह से बिस्तर पर जाने के बाद भी नींद आने में बहुत परेशानी होती है। धीरे-धीरे यह स्थिति ‘अनिद्रा’ का रूप ले सकती है। रात की नींद पूरी न होने का नतीजा यह होता है कि आप अगले पूरे दिन थकान और चिड़चिड़ापन महसूस करते हैं।
पैनिक डिसऑर्डर की वजह
शॉर्ट वीडियो में कंटेंट बहुत तेजी से बदलता है। इस तरह के तेज कंटेंट को लगातार देखने से हमारे दिमाग पर काफी दबाव पड़ता है, जिससे बेचैनी और घबराहट महसूस होने लगती है। कुछ लोगों में यह स्थिति इतनी गंभीर हो जाती है कि यह ‘पैनिक डिसऑर्डर’ का रूप ले लेती है। इस समस्या में व्यक्ति को बिना किसी स्पष्ट कारण के अचानक तेज घबराहट के दौरे आने लगते हैं।
क्या है बचाव का तरीका?
अर्पिता कोहली के अनुसार, रील्स देखना अपने आप में पूरी तरह गलत नहीं है, लेकिन इसकी मात्रा और समय पर लगाम लगाना बेहद जरूरी है।
अगर हम डिजिटल कंटेंट देखने का समय सीमित कर लें और सही समय पर इसका इस्तेमाल करें, तो हम इन सभी साइड इफेक्ट्स से आसानी से बच सकते हैं। संतुलन बनाए रखकर ही हम एक बेहतर फिजिकल और मेंटल हेल्थ पा सकते हैं।





