HomeInternationalअमेरिका-कनाडा ट्रेड वॉर में नया मोड़

अमेरिका-कनाडा ट्रेड वॉर में नया मोड़

वॉशिंगटन। अमेरिका और कनाडा के बीच चल रहा ट्रेड वॉर अब एक और चरण में पहुंच गया है। अमेरिका ने कनाडा से आने वाले करीब 1 अरब डॉलर मूल्य के चुनिंदा उत्पादों के आयात पर रोक लगा दी है। यह प्रतिबंध 29 सितंबर 2026 से प्रभावी हुआ है। अमेरिकी आदेश के मुताबिक, प्रतिबंधित सामानों में कुछ मादक पेय, डेयरी से जुड़े उत्पाद और बड़ी इंजन क्षमता वाली मोटरसाइकिलें शामिल हैं।

किन सामानों पर पड़ा असर?

अमेरिकी प्रतिबंध मुख्य रूप से तीन श्रेणियों के कनाडाई उत्पादों को प्रभावित करता है—

1. शराब और मादक पेय: बीयर, वाइन, साइडर, व्हिस्की, रम, जिन, वोदका और अन्य मादक पेय की कुछ श्रेणियां प्रतिबंध के दायरे में हैं। रिपोर्ट के अनुसार प्रतिबंधित आयात में शराब का हिस्सा सबसे बड़ा है।

2. डेयरी उत्पाद: कुछ चुनिंदा डेयरी उत्पाद और व्हे जैसे दूध के उप-उत्पाद भी प्रतिबंधित किए गए हैं। हालांकि, उपलब्ध रिपोर्ट के मुताबिक कनाडाई चीज की सभी श्रेणियां इस प्रतिबंध में शामिल नहीं हैं।

3. मोटरसाइकिल: प्रतिबंध में बड़ी इंजन क्षमता वाली कुछ मोटरसाइकिलें भी शामिल हैं। कनाडा की कंपनी BRP की कुछ Can-Am मोटरसाइकिलें इससे प्रभावित होंगी।

करीब 1 अरब डॉलर का है दायरा

अमेरिकी व्यापार नीति से जुड़े आंकड़ों के आधार पर प्रतिबंध का दायरा करीब 967 मिलियन डॉलर के कनाडाई आयात तक बताया गया है। हालांकि, दोनों देशों के बीच कुल सालाना व्यापार लगभग 880 अरब डॉलर का है, इसलिए यह प्रतिबंध कुल द्विपक्षीय व्यापार का अपेक्षाकृत छोटा हिस्सा है।

पहले से लगे थे भारी टैरिफ

यह कदम अचानक नहीं आया है। अमेरिका पहले ही कनाडाई सामानों की कुछ श्रेणियों पर भारी शुल्क लगा चुका है। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि कनाडा की डेयरी व्यापार नीतियों से अमेरिकी उत्पादों को नुकसान पहुंचता है। इसी आधार पर अमेरिका ने कुछ कनाडाई उत्पादों पर अतिरिक्त शुल्क लगाने के बाद अब चुनिंदा वस्तुओं को सीधे आयात से बाहर किया है।

कनाडा ने भी दिया जवाब

अमेरिकी कदमों के जवाब में कनाडा ने भी करीब 20 अरब डॉलर के अमेरिकी उत्पादों पर जवाबी टैरिफ लगाए हैं। इनमें स्टील, एल्युमीनियम, उपकरण, कपड़े, कॉस्मेटिक्स और कृषि उपकरण जैसी वस्तुएं शामिल हैं।

दोनों देशों के बीच बढ़ता व्यापारिक तनाव अब केवल टैरिफ तक सीमित नहीं रह गया है। आयात प्रतिबंधों के कारण दोनों तरफ के कारोबारियों को नए बाजार और सप्लाई विकल्प तलाशने पड़ सकते हैं।

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