Saturday, March 7, 2026
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सैनिक शासन के बाद धीरे-धीरे आजादी के पक्षधर थे नेताजी सुभाष चन्द्र बोस

1943में ही आजाद हिन्द फौज ने अंडमान निकोबार द्वीप समूह में फहरा दिया था भारत का तिरंगा

शुक्रवार को अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की ओर से गुंगवाछ में नेता जी सुभाष चन्द्र बोस की प्रतिमा के समक्ष उनकी जयंती मनाई गई। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में ग्रामीण भी शामिल हुए।

कार्यक्रम के संयोजक अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के जिला प्रमुख डा धनन्जय सिंह ने कहा नेताजी सुभाष चंद्र बोस का भारत की स्वतन्त्रता मे अतुलनीय योगदान था। नेताजी ने 30 दिसम्बर 1943 को ही आजाद हिन्द फौज के सहयोग से अंडमान निकोबार मे भारत का तिरंगा फहराया।

नेताजी स्वतंत्रता के बाद कुछ दिनों तक सैनिक शासन लगाकर धीरे धीरे आजादी देने के पक्षधर थे, ताकि लोग स्वतंत्रता का महत्व समझ सके। सहसंयोजक पवन कुमार वर्मा ने कहा कि नेताजी ने आई सी एस की परीक्षा पास कर अपनी बुद्धिमत्ता का परिचय दिया।

लेकिन उन्होेंने उनकी गुलामी स्वीकार करने से इन्कार कर दिया। इस अवसर पर मुर्ति के संस्थापक हरिराम की पत्नी गीता,भास्कर, उमा,धर्मेंद्र सिंह, पूर्व सैनिक सुबेदार जगदीश कुमार पाण्डेय, सुबेदार उमाशंकर शुक्ला, सुबेदार रमापति मिश्रा, सुबेदार एस. पी. द्विवेदी ,सलिल पाण्डेय, पत्रकार ललित कुमार आदि मौजूद रहे।

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