नई दिल्ली। तहलका के पूर्व संपादक तरुण तेजपाल को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिली है। शीर्ष अदालत ने उनकी 10 साल की सजा पर रोक लगाने की मांग को खारिज कर दिया। इस फैसले से तेजपाल को फिलहाल सजा से राहत मिलने की उम्मीदों को झटका लगा है।
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान तरुण तेजपाल की ओर से सजा पर रोक लगाने के पक्ष में दलीलें पेश की गईं। वहीं, मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से सजा पर रोक का विरोध किया गया। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार करने के बाद सजा पर रोक लगाने से इनकार कर दिया।
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने अपराध की प्रकृति और सजा की अवधि को महत्वपूर्ण माना। अदालत ने स्पष्ट किया कि अपील पर सुनवाई के लिए पहले कानूनी प्रक्रिया का पालन जरूरी है।
यह मामला नवंबर 2013 में गोवा के एक होटल में महिला पत्रकार के साथ कथित यौन उत्पीड़न से जुड़ा है। मई 2021 में निचली अदालत ने तेजपाल को बरी कर दिया था, लेकिन बॉम्बे हाईकोर्ट की गोवा पीठ ने 6 अगस्त 2026 को उस फैसले को पलटते हुए उन्हें दोषी ठहराया और 10 साल की कठोर कैद सुनाई।
गोवा सरकार ने भी सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर सजा को बढ़ाकर उम्रकैद करने की मांग की है।


