कार्य बंटवारे में बदलाव को लेकर उठे सवालों के बाद आयोग ने लिया पुनर्विचार का फैसला, पुराने सिस्टम की वापसी से प्रशासनिक कामकाज को सुचारु बनाने की कोशिश
नई दिल्ली। चुनाव आयोग में कार्यों के आवंटन को लेकर सामने आए विवाद के बीच अब एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है। आयुक्तों की आपत्ति के बाद आयोग में कार्यों के आवंटन की पुरानी व्यवस्था को फिर से बहाल कर दिया गया है। इस फैसले के साथ ही कार्य बंटवारे को लेकर चल रही खींचतान पर फिलहाल विराम लग गया है। आयोग के भीतर कार्यों के आवंटन को लेकर उठे सवालों के बाद व्यवस्था में बदलाव पर पुनर्विचार किया गया और पुराने सिस्टम को दोबारा लागू करने का निर्णय लिया गया।
आयुक्तों की आपत्ति के बाद बदला फैसला
जानकारी के मुताबिक, चुनाव आयोग में कार्यों के आवंटन को लेकर किए गए बदलाव पर आयुक्तों ने आपत्ति जताई थी। कार्य बंटवारे की नई व्यवस्था को लेकर सामने आई असहमति के बाद मामले को दोबारा देखा गया। इसके बाद पहले से चली आ रही व्यवस्था को बहाल करने का फैसला किया गया।
इस घटनाक्रम ने चुनाव आयोग के प्रशासनिक कामकाज और आंतरिक व्यवस्था को लेकर चर्चा तेज कर दी थी। आयोग जैसे महत्वपूर्ण संवैधानिक संस्थान में जिम्मेदारियों का स्पष्ट निर्धारण बेहद अहम माना जाता है। ऐसे में कार्य आवंटन को लेकर उठी आपत्तियों के बाद पुरानी व्यवस्था की वापसी को महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
विवाद के बाद पुरानी व्यवस्था पर लौटने का निर्णय
कार्य आवंटन किसी भी संस्थान के नियमित कामकाज का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। इससे अधिकारियों और संबंधित पदाधिकारियों की जिम्मेदारियां तय होती हैं तथा विभिन्न मामलों के निस्तारण की प्रक्रिया आगे बढ़ती है। चुनाव आयोग में भी कार्यों के बंटवारे को लेकर व्यवस्था बनाए रखना प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है।
आयुक्तों की आपत्ति के बाद पुरानी व्यवस्था को बहाल किए जाने से यह संकेत मिला है कि कार्य आवंटन के मुद्दे पर उठे सवालों को गंभीरता से लिया गया। इस फैसले के बाद आयोग के भीतर जिम्मेदारियों के निर्धारण को लेकर पहले से लागू प्रक्रिया फिर प्रभावी हो गई है।
आयोग के कामकाज पर बनी रहेंगी नजरें
चुनाव आयोग देश में चुनावी प्रक्रिया के संचालन और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने वाली प्रमुख संवैधानिक संस्था है। ऐसे में आयोग के भीतर प्रशासनिक फैसलों और कार्य आवंटन से जुड़े घटनाक्रमों को महत्वपूर्ण माना जाता है।
फिलहाल पुरानी व्यवस्था की बहाली के बाद विवाद पर विराम लग गया है। अब यह देखना अहम होगा कि आगे आयोग का कामकाज किस तरह आगे बढ़ता है और कार्य आवंटन की व्यवस्था में भविष्य में कोई नया बदलाव किया जाता है या नहीं।


