रेस्टोरेंट इंडस्ट्री में कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की डिलीवरी बंद होने की आशंका है, जिससे NRAI ने सरकार से हस्तक्षेप की मांग की है। हालांकि सरकार ने प्रतिबंध से इनकार किया है, सप्लायर्स डिलीवरी नहीं कर पा रहे हैं।
रेस्टोरेंट इंडस्ट्री में एलपीजी सिलेंडर की डिलीवरी पूरी तरह बंद होने की आशंका गहरा गई है। नेशनल रेस्टोरेंट एसोसिएशन ऑफ इंडिया (NRAI) ने केंद्र सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है, क्योंकि सप्लायर्स ने कमर्शियल सिलेंडर की डिलीवरी रोकने का संकेत दिया है। हालांकि सरकार ने स्पष्ट किया है कि कोई आधिकारिक बैन नहीं लगाया गया है, लेकिन ग्राउंड रियलिटी अलग है।
NRAI ने सोमवार को X (पूर्व ट्विटर) पर पोस्ट किया कि सरकार ने स्पष्ट किया है कि रेस्टोरेंट इंडस्ट्री के लिए कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की सप्लाई पर कोई प्रतिबंध नहीं है। लेकिन वास्तविक स्थिति में सप्लायर्स डिलीवरी नहीं कर पा रहे हैं। इससे रेस्टोरेंट ऑपरेशंस बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं और नागरिकों के लिए खाने की उपलब्धता (फूड एस एन एशियल सर्विस) पर असर पड़ रहा है। एसोसिएशन ने पेट्रोलियम मंत्री, खाद्य प्रसंस्करण मंत्री और अन्य संबंधित मंत्रालयों से तुरंत स्पष्टीकरण और हस्तक्षेप की अपील की है।
क्या है पूरा मामला?
पश्चिम एशिया (मुख्य रूप से ईरान-अमेरिका तनाव) में जारी संकट के कारण भारत में एलपीजी की आपूर्ति पर दबाव बढ़ गया है। 5 मार्च 2026 को पेट्रोलियम मंत्रालय ने इमरजेंसी पावर का इस्तेमाल करते हुए सरकारी रिफाइनरियों (IOCL, BPCL, HPCL) को आदेश दिया कि वे LPG उत्पादन को अधिकतम करें और उपलब्ध प्रोपेन-ब्यूटेन को मुख्य रूप से घरेलू उपभोक्ताओं के लिए इस्तेमाल करें।
इस निर्देश के बाद कई राज्यों में कमर्शियल सिलेंडर की डिलीवरी पर रोक लग गई है। मुंबई, पुणे, पंजाब, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु जैसे इलाकों में रेस्टोरेंट ऑपरेटर्स ने शिकायत की है कि 19 किलो वाले कमर्शियल सिलेंडर नहीं मिल रहे। मुंबई में अकेले करीब 9,000 रेस्टोरेंट और बार प्रभावित हो सकते हैं, जहां कुछ दिनों में फूड सर्विस ठप हो सकती है।
NRAI का क्या है कहना?
NRAI ने 7 मार्च को पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी को पत्र लिखकर कहा कि रेस्टोरेंट इंडस्ट्री मुख्य रूप से कमर्शियल LPG पर निर्भर है। कोई भी डिसरप्शन लाखों रेस्टोरेंट के बंद होने का कारण बन सकता है, जिससे लाखों लोगों की नौकरियां जा सकती हैं। एसोसिएशन का कहना है कि यह स्थिति खाद्य सुरक्षा को भी खतरे में डाल रही है।
कीमतों में भी हुआ उछाल
1 मार्च को कमर्शियल 19 किलो सिलेंडर की कीमत में 115 रुपये की बढ़ोतरी हुई है। कई शहरों में अब यह 1800-1900 रुपये के आसपास पहुंच गया है, जो रेस्टोरेंट्स की ऑपरेटिंग लागत को और बढ़ा रहा है।
सरकार का पक्ष है कि घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता दी जा रही है, क्योंकि वे आम जनता हैं, जबकि कमर्शियल यूजर्स प्रॉफिट कमाते हैं। लेकिन इंडस्ट्री का तर्क है कि रेस्टोरेंट बंद होने से आम आदमी को ही सबसे ज्यादा परेशानी होगी।





