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‘फोटो खिंचवाते वक्त फिसला केतन का पैर’, लेकिन मोबाइल में नहीं मिली एक भी तस्वीर; सिया के झूठ का ऐसे हुआ पर्दाफाश

पुणे के केतन अग्रवाल की मौत का राज खुल गया है, जिसे पहले फोटो खींचते समय पैर फिसलने से हुई दुर्घटना बताया गया था। आइए केतन के हत्या की पूरी कहानी…

पुणे के रहने वाले केतन अग्रवाल की मौत के मामले में एक के बाद एक नए खुलासे हो रहे हैं। पहले रियल एस्टेट बिजनेस के डायरेक्टर केतन की मंगेतर सिया ने दावा किया कि उनकी मौत फोटो खिंचवाते समय पैर फिसल जाने से हुई।

दरअसल, लोहागढ़ किले में ऊपर एक सुनसान चट्टान के किनारे पर, सिया गोयल और चेतन दोनों ने केतन को 400 फीट गहरी खाई में धक्का दे दिया। इसके बाद सिया ने शोर मचाते हुए दावा किया कि फोटो खिंचवाते समय उसका पैर फिसल गया था।

हालांकि, केतन के परिवार ने गलती से गिरने की थ्योरी को नहीं माना। उन्होंने कहा कि एक अनुभवी ट्रेकर आसानी से फिसलेगा नहीं। परिवार की ओर से औपचारिक शिकायत दर्ज कराने के बाद हत्या का मामला दर्ज किया गया। इसके बाद मामले की जांच शुरू हुई।

पुलिस को कैसे हुआ संदेह?

सिया गोयल के बार-बार बदलते बयानों से पुलिस को यह संदेह हो गया कि केतन अग्रवाल की हत्या की गई है। लोनावला ग्रामीण पुलिस के इंस्पेक्टर दिनेश तायडे ने कहा कि पहले उसने दावा किया कि अग्रवाल फोटो खिंचवाते समय फिसल गए थे, बाद में उसने कहा कि पानी की बोतल देते समय वे गिर गए थे।

लेकिन इस मामले में तब और अहम मोड़ आया जब उसके मोबाइल फोन में उस दिन की कोई तस्वीर नहीं मिली। इससे संदेह और बढ़ गया।

एक अन्य जांच में खुलासा हुआ है कि सिया गोयल ने केतन अग्रवाल का पासपोर्ट फाड़कर और उसे खलापुर टोल प्लाजा के पास एक शौचालय में फेंककर 6 जून को बाली की नियोजित प्री-वेडिंग ट्रिप को पहले ही नाकाम कर दिया था। अब सिया ने इस बात को स्वीकार कर लिया है कि चेतन इस यात्रा के खिलाफ था, जिसके कारण उसने पासपोर्ट फाड़कर फेंक दिया।

हत्या की बनाई गई थी प्लानिंग

पुणे ग्रामीण पुलिस उपाधीक्षक गजानन ने कहा कि मार्केट यार्ड निवासी गोयल और उसके साथी चौधरी ने हत्या की सुनियोजित योजना बनाई थी। कोंढवा निवासी चौधरी सिया और केतन की पाछा करते हुए पवना बांध के सामने विंचू काटा रिज के पास एक सुनसान जगह पर गया।

सिया और चेतन चौधरी ने हत्या की पहले से प्लानिंग बना रखी थी। जैसे ही सिया के साथ केतन सूनसान पहाड़ी पर पहुंचा, पीछे से चेतन भी वहां आ गया और पीछे से दोनों ने मिलकर केतन अग्रवाल को धक्का दे दिया।

इस मामले में अहम मोड़ लोहागढ़ की तलहटी के पास लगे सीसीटीवी फुटेज से आया, जिसमें एक नकाबपोश व्यक्ति (जिसकी पहचान बाद में चौधरी के रूप में हुई) दंपति का पीछा करते हुए दिखाई दिया।

किले पर 10 मिनट से भी कम समय बिताया चेतन

लोनावला ग्रामीण पुलिस के इंस्पेक्टर दिनेश तायडे ने कहा कि जब चेतन चौधरी गार्ड द्वारा प्रवेश के बारे में पूछा गया तो उसने कहा कि वह व्यायाम करने आया है और वापस आते समय पेमेंट कर देगा। चौधरी ने किले की चोटी पर 10 मिनट से भी कम समय बिताया और 50 मिनट से भी कम समय में चढ़ाई और उतराई पूरी कर ली।

चेतन जिस तरह किले में आया था, उस पर किसी का भी ध्यान न जाए, ऐसा मुश्किल था। चेतन हुडी पहनकर आया था, जिसे उसने अपने मुंह के नीचे तक खींचा हुआ था, जिससे उसका चेहरा दिखाई न दे। उसने हेडफोन पहने हुए थे और वो टिकट काउंटर के पास से ऐसे गुजरा जैसे वह स्टाफ को नजरअंदाज कर रहा हो।

गार्ड की बात उस बात को और पुख्ता करती है जो CCTV फुटेज से पहले ही पता चल गई थी कि किले में चेतन का आना जानबूझकर, सोच-समझकर और पहचान छिपाकर किया गया था।

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