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‘विकसित भारत’ के लिए गांवों में नवाचार जरूरी, जम्मू-कश्मीर के LG मनोज सिन्हा ने की ‘विलेज इनोवेशन लैब्स’ की पैरवी

उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य के लिए पंचायतों में ‘विलेज इनोवेशन लैब्स’ स्थापित करने की वकालत की। उन्होंने कहा कि नवाचार को गांवों तक ले जाना और पंचायतों को डिजिटल सुशासन व जनविश्वास का केंद्र बनाना समय की मांग है।

जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने मंगलवार को पंचायतों में ‘विलेज इनोवेशन लैब्स’ स्थापित करने की वकालत करते हुए कहा कि देश को विकसित भारत के लक्ष्य तक पहुंचाने के लिए नवाचार को गांवों और पंचायतों तक ले जाना होगा। उन्होंने कहा कि पंचायतों को नवाचार, डिजिटल सुशासन, जवाबदेही और जनविश्वास के केंद्र के रूप में विकसित करना समय की आवश्यकता है।

श्रीनगर के शेरे कश्मीर इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर (एसकेआईसीसी) में पंचायत-नेतृत्व वाली सेवा वितरण पर आयोजित क्षेत्रीय कार्यशाला ‘सेवा से समृद्धि’ को संबोधित करते हुए सिन्हा ने कहा कि भारत पहले ही प्रौद्योगिकी और नवाचार के क्षेत्र में वैश्विक पहचान बना चुका है। अब समय आ गया है कि इस नवाचार को गांवों तक पहुंचाया जाए, ताकि प्रत्येक नागरिक विकसित भारत के निर्माण की यात्रा में सक्रिय भागीदार बन सके।

उन्होंने पंचायतों के बीच ज्ञान और अनुभव साझा करने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा, ‘यदि हरियाणा की कोई पंचायत कर्नाटक के लिए आदर्श मॉडल बनती है या जम्मू-कश्मीर की नवाचार पहल किसी अन्य राज्य के लिए लाभकारी सिद्ध होती है, तो इससे सुशासन को मजबूती मिलेगी और राष्ट्रीय एकता को भी बढ़ावा मिलेगा।’

लोकतंत्र को मजबूत करने के व्यापक प्रयास किए

उपराज्यपाल ने कहा कि पंचायतों के नेतृत्व में निर्बाध सेवा वितरण आधुनिक प्रशासन का एक महत्वपूर्ण अंग है। उन्होंने याद दिलाया कि जम्मू-कश्मीर में पहले प्रभावी त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था का अभाव था, लेकिन इसके लागू होने के बाद जमीनी लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए व्यापक प्रयास किए गए।

सिन्हा ने जम्मू कश्मीर में पंचायत राज व्यवस्था में सुधार का उल्लेख करते हुए कहा कि जम्मू-कश्मीर में पहले प्रभावी त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था नहीं थी। हमने पंचायत राज संस्थाओं को धन, कार्य और कर्मचारियों का हस्तांतरण सुनिश्चित किया, जिससे उन्हें विकास योजनाओं में सार्थक भागीदारी का अधिकार मिला। उन्होंने बताया कि पंचायत राज संस्थाओं के परामर्श से जिला स्तरीय विकास योजनाएं तैयार की गईं, जिसके परिणामस्वरूप ग्रामीण क्षेत्रों में अनेक जनकल्याणकारी परियोजनाओं का सफल क्रियान्वयन हुआ।

डिजिटल परिवर्तन का उल्लेख करते हुए उपराज्यपाल ने कहा कि वर्ष 2020 में पदभार संभालने के समय प्रशासनिक प्रक्रियाएं अभी भी फाइलों को श्रीनगर और जम्मू के बीच भौतिक रूप से भेजने पर निर्भर थीं। उन्होंने कहा कि यह जानकर मुझे आश्चर्य हुआ था कि फाइलों से भरे ट्रक श्रीनगर और जम्मू के बीच भेजे जाते थे। आज प्रशासन पूरी तरह डिजिटल परिवर्तन से गुजर चुका है और सेवाएं उल्लेखनीय दक्षता के साथ ऑनलाइन उपलब्ध कराई जा रही हैं।

4,211 पंचायतें डिजिटल नेटवर्क से जुड़ चुकी

उन्होंने बताया कि जम्मू-कश्मीर में 1,100 से अधिक सरकारी सेवाएं ऑनलाइन उपलब्ध कराई जा चुकी हैं, जिससे केंद्र शासित प्रदेश डिजिटल सेवा वितरण के क्षेत्र में अग्रणी इकाइयों में शामिल हो गया है। साथ ही ‘बैक टू विलेज’ और ‘ब्लॉक दिवस’ जैसे जनसंपर्क कार्यक्रमों ने प्रशासन और जनता के बीच की दूरी कम करने में अहम भूमिका निभाई है।

सिन्हा ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में डिजिटल सशक्तिकरण के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति हुई है और वर्तमान में 15,000 से अधिक कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) संचालित हो रहे हैं। उन्होंने बताया कि केंद्र शासित प्रदेश की 4,290 पंचायतों में से 4,211 पंचायतें डिजिटल नेटवर्क से जुड़ चुकी हैं, जो 98 प्रतिशत से अधिक कनेक्टिविटी को दर्शाता है। शेष पंचायतें दूरदराज और सीमावर्ती क्षेत्रों में स्थित हैं, जहां कनेक्टिविटी अभी भी चुनौती बनी हुई है। हालांकि, वाइब्रेंट विलेजेज कार्यक्रम के तहत प्रत्येक सीमावर्ती गांव तक 4जी कनेक्टिविटी, सड़क, बिजली और संचार सुविधाएं पहुंचाने के प्रयास जारी हैं।

उपराज्यपाल ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में डिजिटल लेन-देन में पिछले कुछ वर्षों के दौरान तेज वृद्धि हुई है, जो डिजिटल प्रशासनिक तंत्र के प्रति जनता के बढ़ते विश्वास का प्रमाण है।

उन्होंने कहा कि भविष्य की पंचायत केवल एक प्रशासनिक संस्था नहीं, बल्कि नवाचार, समान अवसर, सतत विकास और जनभागीदारी का सशक्त मंच होनी चाहिए। सिन्हा ने कहा, “हमें मिलकर ऐसी पंचायतों का निर्माण करना है जहां नागरिकों को सेवाएं उनके घर-द्वार पर उपलब्ध हों, शिकायतों का त्वरित समाधान हो, निर्णय सामूहिक रूप से लिए जाएं तथा प्रशासन पारदर्शी और जवाबदेह बना रहे।

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