हमीरपुर। प्रदेश में भूगर्भ जल संसाधनों के बढ़ते महत्व को देखते हुए भूगर्भ जल विभाग द्वारा भूजल के सर्वेक्षण, अनुसंधान, प्रबंधन और संरक्षण के लिए विभिन्न योजनाएं संचालित की जा रही हैं। वर्ष 2004 में विभाग को भूगर्भ जल संरक्षण एवं प्रबंधन के लिए नोडल एजेंसी घोषित किया गया था।
नवीनतम आंकड़ों के अनुसार प्रदेश के 75 जनपदों के 826 विकास खंडों में से 44 विकास खंड अतिदोहित, 48 क्रिटिकल, 171 सेमी क्रिटिकल तथा 563 विकास खंड सुरक्षित श्रेणी में हैं। वित्तीय वर्ष 2024-25 में प्री-मानसून और पोस्ट-मानसून के दौरान भूजल स्तर मापन का कार्य पूरा किया गया। इसके साथ ही 184 अक्रियाशील पीजोमीटर के स्थान पर नए पीजोमीटर स्थापित किए गए तथा 200 पीजोमीटर का रखरखाव किया गया।
वित्तीय वर्ष 2025-26 में भी 233 नए पीजोमीटर स्थापित किए गए हैं तथा निर्धारित लक्ष्य के अनुरूप रखरखाव कार्य पूरा किया गया है। जन जागरूकता के लिए प्रदेश में प्रतिवर्ष 15 से 22 जुलाई के बीच “भूजल सप्ताह” का आयोजन किया जाता है।
बुंदेलखंड क्षेत्र में जल प्रबंधन सुधार के लिए भारत और इजराइल के सहयोग से “इंडिया-इजराइल बुंदेलखंड वाटर प्रोजेक्ट” संचालित किया जा रहा है, जिसके तहत आधुनिक तकनीक से जल संरक्षण और सिंचाई के उपाय लागू किए जा रहे हैं। इसके अलावा अटल भूजल योजना के अंतर्गत प्रदेश के 88 अतिदोहित व क्रिटिकल विकास खंडों में जल सुरक्षा योजना विकसित की जा रही है।





