अंबेडकरनगर जनपद में निजी विद्यालयों द्वारा मनमाने ढंग से फीस बढ़ाने और स्कूल परिसर या चिह्नित दुकानों से महंगे दामों पर किताबें-कॉपियां बेचने की शिकायतें लगातार बढ़ रही हैं। जलालपुर, अकबरपुर, टांडा, बसखारी, आलापुर, कटेरी, जहांगीरगंज समेत जिले के विभिन्न क्षेत्रों में अभिभावक शिक्षा के नाम पर खुली लूट से परेशान हैं।कई स्कूलों में एडमिशन फीस के नाम पर 10 से 20 हजार रुपये तक वसूले जा रहे हैं। इसके अलावा वार्षिक शुल्क, यूनिफॉर्म, ड्रेस और अन्य मदों में भी बिना उचित आधार के इजाफा किया जा रहा है। किताबों और कॉपियों को लेकर सबसे ज्यादा शिकायतें हैं—स्कूल अभिभावकों को अपनी तय दुकान या बुक स्टॉल से ही सामग्री खरीदने के लिए मजबूर करते हैं, जहां बाजार मूल्य से 2-3 गुना या उससे अधिक दाम वसूले जाते हैं। कुछ स्कूल सामान्य किताबों पर अपना कवर लगाकर भी महंगे दाम पर बेच रहे हैं।
बाजार से सस्ती किताब लाने पर एडमिशन रद्द करने की धमकी दी जा रही है।एक अभिभावक ने बताया, “बच्चे की पढ़ाई के नाम पर हर तरफ से लूट हो रही है। फीस बढ़ रही है, किताबें महंगी, ड्रेस अलग से। शिकायत करने पर कोई सुनवाई नहीं होती।” मध्यमवर्गीय परिवारों की कमर टूट रही है, लेकिन स्कूल प्रबंधन की मनमानी थमने का नाम नहीं ले रही।उत्तर प्रदेश स्ववित्तपोषित स्वतंत्र विद्यालय (शुल्क विनियमन) अधिनियम 2018 के तहत अंबेडकर नगर में भी जिला शुल्क नियामक समिति कार्यरत है। इस समिति की अध्यक्षता जिलाधिकारी (डीएम) करते हैं तथा जिला विद्यालय निरीक्षक (डीआईओएस) सदस्य सचिव के रूप में कार्य करते हैं।
समिति में चार्टर्ड अकाउंटेंट, पीडब्ल्यूडी के इंजीनियर और अभिभावक प्रतिनिधि आदि सदस्य शामिल होते हैं।अभिभावक अब सामूहिक रूप से आवाज उठाने की तैयारी कर रहे हैं और मांग कर रहे हैं कि जिला शुल्क नियामक समिति सक्रिय होकर नियमित निरीक्षण करे, फीस बढ़ोतरी पर सख्त सीमा लागू की जाए, किताबों की खरीद पर स्वतंत्र विकल्प दिया जाए और हर साल किताबें बदलने की प्रथा रोकी जाए।इस मुद्दे पर जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग से ठोस कदम उठाने की अपेक्षा की जा रही है। यदि समिति प्रभावी ढंग से कार्य करती है तो अभिभावकों को राहत मिल सकती है, अन्यथा शिक्षा महंगी होने से मध्यमवर्गीय परिवार प्रभावित होंगे।





