केंद्र सरकार ने बताया कि पश्चिम एशिया संकट के कारण घरेलू एलपीजी सिलेंडर की लागत 1600 रुपये से अधिक हो गई है, जिस पर सरकार को अभी भी 700 रुपये प्रति सिलेंडर का घाटा हो रहा है।
केंद्र सरकार ने रविवार को कहा कि पश्चिम एशिया संकट के चलते 14.2 किलोग्राम के घरेलू एलपीजी सिलिंडर की आपूर्ति लागत 1,600 रुपये से अधिक हो गई है। घरेलू एलपीजी सिलिंडर के दामों में बीते रोज की गई 29 रुपये की बढ़ोतरी के बावजूद सरकार को अभी भी प्रति सिलिंडर लगभग 700 रुपये का नुकसान उठाना पड़ रहा है।
इस बीच विपक्ष ने सरकार पर तीखा हमला करते हुए कहा है कि सरकार ने तीन माह में घरेलू सिलिंडर के दाम 89 रुपये बढ़ाकर आमजन की रसोई का बजट बिगाड़ दिया है। पश्चिम एश्यिा संकट के दौरान कई देशों से ईंधन आपूर्ति सुनिश्चित करने के दावे का आखिर क्या हुआ?
वहीं सत्ता पक्ष का कहना है कि जब एलपीजी सिलिंडर की कीमतों में मामूली बढ़ोतरी होती है तो विपक्ष हंगामा खड़ा कर देता है। मगर वह यह क्यों नहीं बताता कि आज भी भारत में रसोई गैस दुनिया में सबसे सस्ते दामों पर उपलब्ध है।
पीटीआई के अनुसार, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने बताया कि पश्चिम एशिया संकट और होर्मुज स्ट्रेट में व्यवधान के कारण फरवरी से जून के बीच एलपीजी की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में लगभग 46% की वृद्धि हुई है।
भारत अपनी आवश्यकता का बड़ा हिस्सा आयात करता है लेकिन इसके बावजूद इस बोझ को सीधे उपभोक्ताओं पर नहीं डाला। घरेलू एलपीजी पर अंडर रिकवरी का बोझ लगभग 60,000 करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है, जिसे सरकार और सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियां वहन कर रही हैं। इसके अतिरिक्त, 10.58 करोड़ से अधिक उज्ज्वला लाभार्थियों को प्रति सिलिंडर 300 रुपये की प्रत्यक्ष सहायता भी जारी है।
मंत्रालय ने कहा कि सबसे बड़ी बात यह है कि वैश्विक संकट के बावजूद भारत में न तो गैस की कमी हुई और न ही आपूर्ति बाधित हुई। सरकार ने उत्पादन बढ़ाया, वैकल्पिक स्रोतों से आयात सुनिश्चित किया और देशभर में निर्बाध आपूर्ति बनाए रखी है।
आइएएनएस के अनुसार, होटल और रेस्तरां द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले 19 किलोग्राम के सिलिंडर की दिल्ली में कीमत 3,113.50 रुपये है। पश्चिम एशिया संकट के दौरान इसमें पांच बार वृद्धि हो चुकी है और यह लगभग 164 रुपये प्रति किलोग्राम है, इसके विपरीत वर्तमान में घरेलू एलपीजी सिलिंडर में उपभोक्ता लगभग 66 रुपये प्रति किलोग्राम का भुगतान करता है।
इंटरनेट मीडिया के अनुसार, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि बढ़ती गैस कीमतों ने आम जनता की रसोई का बजट बिगाड़ दिया है। पश्चिम एशिया संकट के बाद से घरेलू एलपीजी सिलेंडर के दाम 89 रुपये बढ़ा दिए गए हैं। आखिर पीएम मोदी के ईंधन आपूर्ति सुनिश्चित करने के दावे का क्या हुआ? यानी हकीकत कुछ और है।
राकांपा (शप) प्रमुख शरद पवार ने कहा कि पेट्रो पदार्थों के दाम बढ़ा जनता को किस्तों में झटके दिए जा रहे हैं। भाजपा आइटी विंग के प्रमुख अमित मालवीय ने कहा कि जब एलपीजी सिलिंडर की कीमतों में मामूली वृद्धि होती है तो विपक्ष हंगामा कर देता है। वह यह क्यों नहीं बताता कि आज भी भारत में रसोई गैस दुनिया के सबसे सस्ते दामों पर उपलब्ध है।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि वैश्विक संकट के बावजूद भारत में न तो गैस की कमी हुई और न ही आपूर्ति बाधित हुई। सरकार ने उत्पादन बढ़ाया, वैकल्पिक स्रोतों से आयात सुनिश्चित किया और देशभर में निर्बाध आपूर्ति बनाए रखी।
एएनआइ के अनुसार, भाजपा नेता शहनवाज हुसैन ने कहा कि दुनियाभर के देशों में कीमतें बढ़ रहीं हैं और सऊदी अरब के बाद अगर दुनिया में कहीं कीमतों में सबसे कम बढ़ोतरी हुई है, तो वह भारत में हुई है।
पड़ोसी देशों में सिलिंडर के दाम
- श्रीलंका – 1,241 रुपये
- बांग्लादेश – 1,225 रुपये
- नेपाल – 1,207 रुपये
- पाकिस्तान –1,046 रुपये
विकसित देशों में सिलिंडर की कीमत
- कनाडा – 2,411 रुपये
- आस्ट्रेलिया – 1,765 रुपये
- अमेरिका – 1,755 रुपये





