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क्या Coempt ने CBSE को पुराने साइबर प्रमाण-पत्र दिए? यहां देखें पूरी डिटेल

तमाम मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो कोएम्प्ट ने सीबीएसई को ऐसे साइबर प्रमाण-पत्र दिए जिनकी वैधता पहले ही समाप्त हो चुकी थी।

सीबीएसई ने उस कंपनी के खिलाफ कार्यवाही शुरू कर दी है, जिसे कक्षा 12वीं की कॉपियों की जांच के लिए टेंडर दिया गया था। इस पूरे विवाद में शिक्षा मंत्री का कहना है कि इस मामले में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त से सख्त कार्यावाही की जाएगी। तमाम मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो, जब फरवरी से लेकर मई माह के बीच OSM सिस्टम के तहत कक्षा 12वीं कॉपी मूल्यांकन कार्य पूरा किया जा रहा था। तब कई साइबर सुरक्षा के शोधकर्ताओं ने OSM प्रणाली में कई खामियों को उजागर किया था।

मीडिया रिपोर्ट्स की मानें, तो कोएम्प्ट ने सीबीएसई को जो दो साइबर प्रमाण-पत्र दिए थे। उनकी वैधता पहले ही समाप्त हो चुकी थी।

क्यों उठा COEMPT पर विवाद

दरअसल सीबीएसई की ओर से कक्षा बारहवीं कॉपी जांच के लिए ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली के लिए COEMPT को ठेका दिया था। तमाम मिडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि इस कंपनी का नाम पहले ग्लोबरीना था, जिसे साल 2019 में तेलंगाना ने ब्‍लैकलिस्‍ट किया था। इसके अलावा, COEMPT ने सीबीएसई को दो ऐसे साइबर प्रमाण-पत्र भी दिए थे जो पहले ही एक्सपायर हो चुके थे।

कोएम्प्ट ने कौन से 2 प्रमाणपत्र प्रस्तुत किए

सीबीएसई ने जिस कोएम्प्ट कंपनी को टेंडर दिया था। उस कंपनी ने साल 2025 में साइबर सुरक्षा के मापदंडो को पूरा करने के लिए दो सुरक्षा प्रमाण-पत्र प्रस्तुत किए थे।

पहला प्रमाण-पत्र: यह प्रमाण-पत्र इन्फोसेर्व एलएलपी की ओर से साल 2023 में जारी किया गया था। यह प्रमाण-पत्र साबित करता है कि ओडिशा के बीजू पटनायक प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के लिए जो ऑनमार्क का उपयोग किया गया था। वह उस समय-सीमा के भीतर बिल्कुल सुरक्षित था। लेकिन कोएम्प्ट ने इसी प्रमाण-पत्र को 2025 के सीबीएसई टेंडर में प्रस्तुत किया और इस प्रकार यह प्रमाण-पत्र दो साल पुराना हो चुका था।

दूसरा प्रमाणपत्र: यह प्रमाण -त्र A3S टेक एंड कंपनी द्वारा साल 2025 में जारी किया गया था। यह एक ऐसा प्रमाण-पत्र है, जिसे वनएक्स कहा जाता है न कि ऑनमार्क। इस प्रमाण-पत्र में साफ कहा गया था कि ऑडिट सामग्री टेम्परेरी एप्लिकेशन वर्जन पर आधारित थी और उत्पादन सर्वर को और अधिक सुरक्षित बनाने के लिए इसमें सुधार करने की आवश्यकता है।

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