प्रधानमंत्री मोदी ने एआई समिट में भारतीय युवा कांग्रेस के ‘शर्टलेस प्रदर्शन’ पर कांग्रेस की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि पार्टी ने न केवल अपने कपड़े उतारे, बल्कि वैचारिक दिवालियापन भी दिखाया।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने एआई समिट के दौरान भारतीय युवा कांग्रेस के ‘शर्टलेस प्रदर्शन’ को लेकर कांग्रेस पर तीखा हमला करते हुए कहा कि पार्टी ने विदेशी मेहमानों के सामने न केवल अपने कपड़े उतारे, बल्कि अपना वैचारिक दिवालियापन भी उजागर कर दिया।
उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस विचारधारा के नाम पर केवल विरोध की राजनीति तक सीमित हो गई है। प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले 12 वर्षों में भारत ने अपनी अंतर्निहित शक्ति को पहचाना है और बढ़ते आत्मविश्वास के कारण विकसित देश अब भारत के साथ व्यापार समझौते करने के लिए आगे आ रहे हैं।
पीएम मोदी का कांग्रेस पर निशाना
यहां एक कार्यक्रम में प्रधानमंत्री ने कहा कि लोकतंत्र में विपक्ष का अर्थ हर बात का अंधा विरोध करना नहीं, बल्कि देश के सामने एक वैकल्पिक दृष्टि प्रस्तुत करना होता है। उन्होंने कहा कि एआइ समिट पूरे देश के लिए गर्व का क्षण था, लेकिन कांग्रेस ने इस राष्ट्रीय आयोजन की छवि धूमिल करने का प्रयास किया।
प्रधानमंत्री ने कहा कि प्रदर्शन को लेकर जनता में नाराजगी सामने आने के बाद कांग्रेस ने महात्मा गांधी का नाम लेकर अपने कदम को उचित ठहराने की कोशिश की। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस अपनी गलतियों को छिपाने के लिए अक्सर बापू का सहारा लेती है और उपलब्धियों का श्रेय एक परिवार को देती है।
मोदी ने कहा कि पिछले चार दशकों से देश की जनता कांग्रेस को लगातार सबक सिखा रही है और अब लोग उसे वोट देने योग्य नहीं मानते। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस से वोट छीने नहीं जा रहे, बल्कि जनता स्वयं उससे दूरी बना रही है।
‘2014 से पहले का हाल होता तो कौन आता’
प्रधानमंत्री ने कहा कि यदि देश आज भी 2014 से पहले की निराशा, नीतिगत जड़ता और ‘फ्रैजाइल फाइव’ जैसी स्थिति में फंसा रहता, तो कोई भी राष्ट्र भारत के साथ व्यापार समझौता नहीं करता। पिछले 12 वर्षों में देश की सामूहिक चेतना में नई ऊर्जा का संचार हुआ है और भारत अब अपनी खोई हुई क्षमता को पुनः प्राप्त करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
प्रधानमंत्री के अनुसार मजबूत संस्थाएं और आत्मविश्वास से भरा भारत वैश्विक मंच पर नई भूमिका निभाने के लिए तैयार है। मोदी ने कहा कि किसी भी राष्ट्र की क्षमता अचानक विकसित नहीं होती, बल्कि यह पीढ़ियों के ज्ञान, परंपरा, परिश्रम और अनुभव से निर्मित होती है।





