गुरु हरगोविंद साहिब जी के प्रकाश पर्व अखंडपाठ व शबद कीर्तन के साथ समापन

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इटावा। सिखों के छठवें गुरु हरगोविंद साहिब जी के प्रकाश पर्व पर गुरुद्वारा श्री गुरुतेग बहादुर साहिब में अखंडपाठ व शबद कीर्तन,लस्सी,मिस्सी रोटियों प्याज मक्खन और लस्सी प्रसाद के साथ समापन किया गया।इसमें गुरु के उपदेश केवल माला के साथ नहीं हालात को देखते हुए दूसरे हाथ में तलवार की जरूरत है,अर्थात भक्ति और शक्ति के बिना कोई भी व्यवस्था को नहीं चलाया जा सकता है।

कार्यक्रम में गुरुद्वारा कमेटी के अध्यक्ष तरन पाल सिंह कालड़ा ने अपने संबोधन में बताया कि पहले सिख धर्म भक्ति व सेवा पर आधारित था,लेकिन गुरु हरगोविंद साहिब जी ने नाम जपना,लंगर चलाना,सेवा करना के साथ इसमें सैनिक शिक्षा को जोड़ना अनिवार्य किया और कहा कि धर्म की रक्षा के लिए सैनिक शिक्षा अर्थात शक्ति की महती आवश्यकता होती है,तभी व्यवस्था बनाना संभव है।

उन्होंने गुरु हरगोविंद साहिब जी के प्रकाश पर्व पर सभी को बधाई दी और सभी संगत के सहयोग के लिए धन्यवाद दिया।आगरा से आए रागी भाई हरजिंदर सिंह और कशलीन कौर ने गुरबानी कीर्तन गायन से सभी को प्रभावित किया और धर्मप्रेमियों को आत्मिक आनंद मिला मुख्य ग्रंथी ज्ञानी अमरीक सिंह व किशन सिंह व स्त्री सत्संग की अगुआई में सुखमनी साहिब के पाठ की लड़ी का समापन किया गया।गुरुद्वारे में बच्चों ने सामूहिक सबद गाकर सभी का दिल जीता।महिला श्रद्धालओं ने कविताएं व सबद गायन किया।

इस अवसर पर 12 दिन से सुखमनी साहिब के पाठ यज्ञ में सिख संगत सिंधी समाज संगत पंजाबी समाज संगत ने हर दिन सुबह समाप्ति के बाद प्रसाद लस्सी मिस्सी रोटियों प्याज मक्खन घर घर से बनाकर लाए लोगों ने अपनी मनोकामना की अरदास कराई। गुरद्वारा प्रबंधक कमेटी ने कार्यक्रम को सफल बनाने में सहयोग के लिए सभी का धन्यवाद किया।

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