मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भाजपा पर नेशनल कॉन्फ्रेंस में सेंध लगाने की साजिश का आरोप लगाया, स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी में कोई ‘एकनाथ शिंदे’ नहीं है। यह बयान पार्टी में आंतरिक असंतोष की अटकलों के बीच आया, जिसे नेशनल कॉन्फ्रेंस ने एकजुटता की बैठक कर खारिज करने का प्रयास किया।
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने दो दिन पहले कहा था कि वह ईद के बाद बादलों की तरफ फटना चाहते हैं, लेकिन वह शुक्रवार को फूट पड़े और उन्होंने भाजपा पर नेशनल कान्फ्रेंस में सेंध लगाने के कथित षड्यंत्र का संकेत देते हुए कहा कि नेशनल कान्फ्रेंस में कोई भी एकनाथ शिंदे नहीं है।
उनका यह स्पष्टीकरण पार्टी की गत दिवस श्रीनगर में हुई मैराथन बैठक के बाद आया है, जो साबित कर रहा है कि बिना आग के धुआं नहीं उठता। मुख्यमंत्री के बयान के बाद से प्रदेश के राजनीतिक हल्कों में नेशनल कान्फ्रेंस में गुटबाजी की अटकलों ने फिर जोर पकड़ लिया है।
मौजूदा परिस्थितियों में जम्मू कश्मीर में भाजपा के 29 विधायक हैं। पांच विधायकों को मनोनीत किया जाना है और वह भाजपा को लाभ पहुंचा सकते हैं। इसके अलावा निर्दलीय विधायक भी भाजपा का साथ दे सकते हैं। वहीं पीडीपी के चार में से दो विधायक अगर भाजपा के साथ चले जाएं तो किसी को आश्चर्य नहीं होगा।
भाजपा का करीबी माना जाता है सज्जाद लोन को
पीपुल्स कान्फ्रेंस के चेयरमैन सज्जाद गनी लोन को पहले भी भाजपा का करीबी माना जाता रहा है। ऐसे में सत्ताधारी नेशनल कान्फ्रेंस में अगर विभाजन होता है या उसके कुछ विधायक पार्टी से नाता तोड़ते हैं तो भाजपा को ही लाभ होगा। हालांकि मुख्यमंत्री पहले भी अपनी पार्टी में गुटबाजी की खबरों को नकारते आए हैं, लेकिन जिस अंदाज में उन्होंने अब भाजपा की आलोचना की है, उससे अंदाजा हो जा रहा है कि वह किसी बड़े दबाव का सामना कर रहे हैं। नेशनल कान्फ्रेंस में गुटबाजी और पार्टी शीर्ष नेतृत्व के प्रति तथाकथित असंतोष लगातार बढ़ता जा रहा है।
पार्टी के बागी सांसद आगा सैयद रुहुल्ला के प्रति नेशनल कान्फ्रेंस में एक बड़ा वर्ग सहानुभूति रखता है। बिजबिहाड़ा के विधायक डा. बीए वीरी ने भी पार्टी नेतृत्व को नाराज करते हुए गत अप्रैल में विधानसभा में एक निजी प्रस्ताव लाया था। मंत्रिमंडल में जगह न मिलने से जिला श्रीनगर से भी संबंधित विधाायक नाराज हैं।
पार्टी में चार से सात बार तक चुनाव जीतने वाले कई नेता कथित तौर पर अपनी उपेक्षा से खफा हैं। इसके अलावा सत्ताधारी नेशनल कान्फ्रेंस के कई विधायक महसूस करते हैं कि वे जनता की उम्मीदों को पूरा नहीं कर पा रहे हैं। राज्य का दर्जा और आरक्षण का मुद्दा भी उनके लिए सिरदर्द बन चुका है।
बंगाल के नतीजों से नेकां का शीर्ष नेतृत्व सकते में
नेशनल कान्फ्रेंस की राजनीति पर नजर रखने वालों के मुताबिक बंगाल के चुनाव परिणाम से नेशनल कान्फ्रेंस का शीर्ष नेतृत्व सकते में है और उसे डर है कि संगठन में जिस तरह से असंतोष के स्वर उभर रहे हैं, उसके कुछ विधायक और उसका साथ दे रहे कुछ निर्दलीय पाला बदल कर उसे सत्त्ताच्युत कर भाजपा को सत्तासीन बना सकते हैं। इसी आशंका से दूर करने और सभी एकजुट रखने के लिए ही गत वीरवार को डा. फारूक अब्दुल्ला ने पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की एक बैठक की अध्यक्षता की थी। इसमें मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला, सभी कैबिनेट मंत्री, सभी विधायक और अन्य वरिष्ठ नेता मौजूद रहे।
इस बैठक के जरिए नेशनल कान्फ्रेंस ने अपने विरोधियों को संगठन में सबकुछ ठीक व एकजुटता होने का संदेश देने का प्रयास किया है। नेशनल कान्फ्रेंस के एक नेता ने कहा कि श्रीनगर में हुई बैठक में बंगाल चुनाव, एआइआर और परिमसन जैसे मुद्दों पर चर्चा के साथ पार्टी में एकजुटता बनाए रखने के उपायों पर चर्चा हुई। बैठक में आम आदमी पार्टी के नेताओं के भाजपा में शामिल होने का हवाला भी दिया गया। बैठक में कहा गया कि भाजपा जम्मू कश्मीर में बंगाल दोहरा सकती है, वह नेशनल कान्फ्रेंस को तोड़ने का षडयंत्र कर रही है जिससे सावधान रहने की जरूरत है।
उमर की पार्टी पर पकड़ कमजोर हुई: अरविंद
भाजपा के वरिष्ठ नेता और विधायक अरविंद गुप्ता ने कहा कि मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला बंगाल में भाजपा की जीत से हताश हो चुके हैं। उनकी नेशनल कान्फ्रेंस पर पकड़ कमजोर हो चुकी है, क्योंकि वह जनता की उम्मीदों को पूरा करने में असमर्थ हो रहे हैं, इससे उनके कई साथी और विधायक भी उनसे निराश हो चुके हैं और वह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की कार्यप्रणाली से प्रभावित हैं। हमें नेशनल कान्फ्रेंस केा तोड़ने की कोई जरूरत नहीं है।
उमर अब्दुल्ला के हाथ से रेत की तरह से पार्टी निकल रही है। पंजाब में आम आदमी के नेताओं ने भाजपा का दामन थामा, क्योंकि उन्हें भाजपा में यकीन है और यही स्थिति आज नेशनल कान्फ्रेंस के कई नेताओं और विधायकों की है। रही बात राज्य के मुद्दे पर ब्लैकमेल करने की तो उमर अब्दुल्ला का यह आरोप सिर्फ उनकी अपनी नाकामी छिपाने का एक अच्छा प्रयास है। भाजपा और प्रधानमंत्री पहले ही कई बार कह चुके हैं कि जम्मू कश्मीर को उचित समय पर राज्य का दर्जा मिलेगा।





