Sunday, November 30, 2025
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बजाज फाइनेंस कम्पनी लिमिटेड के नाम पर लोन करने का मामला

पुलिस ने चार जालसाजों को धर दबोचा, म.प्र. व उ.प्र. के रहने वाले हैं बदमाश

ललितपुर। बजाज फाइनेंस कम्पनी लिमिटेड से लोन दिलाने के नाम पर धोखाधड़ी कर लाखों रुपये की हानि कम्पनी को पहुंचाने वाले चार शातिर बदमाशों को कोतवाली पुलिस ने धर दबोचा है। प्रोपर्टी लोन के नाम पर करीब पौने दो करोड़ रुपये का गबन करने वाले शातिर बदमाशों को हिरासत में लेकर पूछताछ की गयी, जिसमें उन्होंने अपना जुर्म कबूल करते हुये पुलिस के समक्ष पूरी घटना का पटाक्षेप किया। कोतवाली पुलिस ने बताया कि बीती पांच अगस्त 2025 को शाम करीब साढ़े छह बजे मु.अ.सं.0881 को झांसी निवासी संदीप सिंह सोलंकी ने बताया कि वह बजाज फाइनेंस लिमिटेड में असिस्टेण्ट मैनेजर रिस्क के पद पर तैनात है।

आरोप लगाया कि कम्पनी में ही कार्यरत आधा दर्जन से अधिक लोगों ने धोखाधड़ी कर कम्पनी के नाम से लोगों को लोन दिलाने के नाम पर करीब 1 करोड़ 71 लाख 1703 रुपये की धोखाधड़ी को अंजाम दिया है। पुलिस ने संदीप सिंह की तहरीर पर उक्त लोगों के खिलाफ बीएनएस की धारा 318(4), 336(3), 338, 340(2), 61(2), 341(2) के तहत एफआईआर दर्ज कर विवेचना शुरू कर दी। एडीजी कानपुर जोन, डीआईजी झांसी व एसपी ललितपुर मो.मुश्ताक के संयुक्त निर्देश, एएसपी कालू सिंह व सीओ सिटी अजय कुमार के निकट पर्यवेक्षण में कोतवाली प्रभारी अनुराग अवस्थी व निरीक्षक नरेन्द्र सिंह ने अपनी टीम के साथ पड़ताल शुरू की।

जांच के दौरान प्रकाश में आये टौरिया मंदिर के पास नेहरू नगर निवासी महेन्द्र राय पुत्र रामबक्श राय, कमिश्नरेट उत्तरी लखनऊ के कस्बा व थाना पारा अंतर्गत गली नं. 5 गायत्री बिहार निवासी अभिनव निगम पुत्र राजेश निगम, म.प्र.ग्वालियर में थाना मुरार अंतर्गत ब्रिज कालोनी कालपी निवासी पारस वर्मा पुत्र घनश्याम, म.प्र. जिला शिवपुरी के थाना दिनारा अंतर्गत पुराना पोस्ट ऑफिस के पास अम्बेड़कर पार्क निकट निवासी विकास दिवाकर पुत्र विजय बाबू दिवाकर को पुलिस ने धर दबोचा है। इनके पास से पुलिस ने चार मोबाइल फोन व 4900 रुपये नकद बरामद किये हैं।

पूछताछ के दौरान उक्त लोगों ने बताया कि वह संगठित गिरोह बनाकर लोगों को गुमराह करते थे और लोन दिलाने के नाम पर कम्पनी में काम करने का अनुभव होने के जरिए ठगी को अंजाम देते थे। बताया कि अपनी ओर से पम्पलेट छपवाकर चस्पा कर दिये थे, जिससे लोगों द्वारा सम्पर्क करने पर उन्हें प्रोपर्टी इत्यादि के कूटरचित दस्तावेज बनाकर लोन दिलाने की प्रक्रिया कराते थे और अन्य दस्तावेजों के आधार पर लोन स्वीकृत कराकर रुपये निकासी कर आपस में बांट लेते थे।

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