नई दिल्ली। दीपावली का त्योहार खुशियों, रोशनी और उत्साह का प्रतीक है। इस दौरान घरों में सजावट, पकवान और आतिशबाजी का माहौल रहता है। हालांकि, गर्भवती महिलाओं के लिए यह त्योहार थोड़ी अतिरिक्त सावधानी बरतने का समय भी है। पटाखों से निकलने वाला जहरीला धुआं, तेज आवाज, प्रदूषण और खान-पान में लापरवाही मां और गर्भ में पल रहे शिशु की सेहत पर असर डाल सकती है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक, गर्भवती महिलाओं को दिवाली के दौरान अपनी दिनचर्या और खान-पान का विशेष ध्यान रखना चाहिए। पटाखों से निकलने वाले धुएं में मौजूद हानिकारक कण सांस संबंधी परेशानी पैदा कर सकते हैं। इसलिए आतिशबाजी वाली जगहों से दूरी बनाए रखना और धुएं के संपर्क में आने से बचना जरूरी है।
पटाखों के धुएं से बनाएं दूरी
दिवाली पर पटाखों से निकलने वाला धुआं वातावरण को प्रदूषित करता है। गर्भवती महिलाओं को खुले में पटाखे जलाने वाली जगहों पर अधिक समय नहीं बिताना चाहिए। घर की खिड़कियां और दरवाजे प्रदूषण की स्थिति के अनुसार बंद रखें तथा जरूरत पड़ने पर साफ हवा वाले स्थान पर रहें।
खान-पान में बरतें सावधानी
त्योहार के दौरान मिठाइयों, तली-भुनी चीजों और मसालेदार पकवानों का सेवन बढ़ जाता है। गर्भवती महिलाओं को इनका सीमित मात्रा में सेवन करना चाहिए। ज्यादा मीठा और तैलीय भोजन एसिडिटी, अपच और ब्लड शुगर की समस्या बढ़ा सकता है। ताजे फल, हरी सब्जियां और पौष्टिक भोजन को प्राथमिकता दें।
पानी पीने में न करें लापरवाही
त्योहार की तैयारियों और मेहमानों के बीच महिलाएं अक्सर पर्याप्त पानी पीना भूल जाती हैं। शरीर में पानी की कमी से बचने के लिए नियमित अंतराल पर पानी पीते रहें। पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ लेना भी जरूरी है।
तेज आवाज और भीड़भाड़ से बचें
पटाखों की तेज आवाज और भीड़भाड़ गर्भवती महिलाओं के लिए असहजता पैदा कर सकती है। ऐसे स्थानों से दूरी बनाए रखें और त्योहार के दौरान जरूरत से ज्यादा भागदौड़ करने से बचें।
आराम और नींद का रखें विशेष ध्यान
दिवाली की सफाई, खरीदारी और मेहमानों की मेजबानी के कारण थकान बढ़ सकती है। गर्भवती महिलाओं को पर्याप्त नींद और आराम लेना चाहिए। भारी सामान उठाने और लंबे समय तक खड़े रहने से बचें।
कब डॉक्टर से लें सलाह?
अगर धुएं के संपर्क में आने के बाद सांस लेने में परेशानी, लगातार खांसी, चक्कर, सीने में दर्द या असामान्य तकलीफ महसूस हो तो तुरंत चिकित्सकीय सलाह लें। गर्भावस्था के दौरान किसी भी असामान्य लक्षण को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
दिवाली का त्योहार खुशियों के साथ मनाएं, लेकिन मां और गर्भ में पल रहे बच्चे की सेहत को सबसे पहले रखें। थोड़ी सी सावधानी त्योहार को सुरक्षित और यादगार बना सकती है।


