HomeMarqueeकृषि केवल आजीविका का साधन नहीं, आर्थिक और सामाजिक विकास की रीढ-डीएम

कृषि केवल आजीविका का साधन नहीं, आर्थिक और सामाजिक विकास की रीढ-डीएम

कृषि विज्ञान केन्द्र कठौरा में हुई वैज्ञानिक सलाहकार समिति की बैठक

मंगलवार को कृषि विज्ञान केंद्र, कठौरा में जिलाधिकारी संजय चौहान की अध्यक्षता में वैज्ञानिक सलाहकार समिति की तृतीय बैठक आयोजित हुई। बैठक में कृषि वैज्ञानिक, प्रशासनिक अधिकारी एवं किसान उपस्थित रहे। बैठक में जनपद के किसानों के बीच उन्नत कृषि तकनीकी का प्रसार, मोटे अनाज की खेती को बढ़ावा, पशुपालन का विकास, नर्सरी स्थापना, व्यावसायिक प्रशिक्षण और शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का अधिकतम लाभ किसानों तक पहुंचाने को लेकर विस्तृत चर्चा की गई। बैठक के दौरान जिलाधिकारी ने कहा कि कृषि वैज्ञानिक एवं प्रशासनिक अधिकारी आपसी समन्वय स्थापित करते हुए शासन की योजनाओं और नवीनतम कृषि तकनीकी को सीधे किसानों के दरवाजे तक पहुंचाएं।

उन्होंने विशेष रूप से मोटे अनाज (मिलेट्स) की खेती पर जोर देते हुए कहा कि इससे न केवल किसानों की आय में वृद्धि होगी, बल्कि यह पोषण सुरक्षा एवं जलवायु अनुकूल कृषि को भी बढ़ावा देगा। उन्होंने निर्देश दिया कि जो किसान पहले से मोटे अनाज की खेती कर रहे हैं, वे अन्य किसानों को भी इसके लिए प्रेरित करें और उनकी आवश्यकता अनुसार बीज एवं प्रशिक्षण उपलब्ध कराएं। पशुपालन को बढ़ावा देने पर भी विशेष चर्चा हुई। जिलाधिकारी ने कहा कि अधिक से अधिक किसानों को पशुपालन के लिए प्रोत्साहित किया जाए और उन्हें आवश्यकतानुसार प्रशिक्षण एवं संसाधन उपलब्ध कराए जाएं, ताकि वे अपनी आय के अतिरिक्त स्रोत विकसित कर सकें।

उन्होंने यह भी कहा कि किसानों को समय-समय पर नवीनतम कृषि आधारित प्रशिक्षण दिया जाए, ताकि वे बदलते मौसम और बाजार की मांग के अनुसार खेती में सुधार कर सकें। साथ ही सरकार द्वारा चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं—जैसे कि फसल बीमा, सिंचाई, उर्वरक, यांत्रिकरण और बागवानी योजनाओं—की जानकारी किसानों तक प्रभावी ढंग से पहुंचाई जाए। बैठक में जिलाधिकारी ने एक समन्वय समिति गठित करने के निर्देश दिए, जिसमें कृषि वैज्ञानिक, कृषि क्षेत्र से जुड़े प्रशासनिक अधिकारी एवं किसानों के प्रतिनिधि शामिल होंगे।

इस समिति की मॉनिटरिंग मुख्य विकास अधिकारी द्वारा की जाएगी। समिति का दायित्व होगा कि जनपद के सभी क्षेत्रों में किसानों को उनकी आवश्यकता के अनुसार प्रशिक्षण, तकनीकी सहायता और शासन की योजनाओं की जानकारी समय पर उपलब्ध कराई जाए। बैठक में उपस्थित कृषि वैज्ञानिकों ने विभिन्न तकनीकी समाधानों और नवीन प्रयोगों की जानकारी साझा की। इनमें जलवायु अनुकूल फसलों का चयन, कीट एवं रोग नियंत्रण के जैविक तरीके, आधुनिक सिंचाई पद्धतियां और फसल विविधीकरण के लाभ शामिल थे। नर्सरी स्थापना, समूह प्रदर्शन और नवयुवक-युवतियों के लिए व्यावसायिक प्रशिक्षण पर भी विस्तृत चर्चा हुई। जिलाधिकारी ने स्पष्ट कहा कि कृषि केवल आजीविका का साधन नहीं, बल्कि यह जनपद के आर्थिक एवं सामाजिक विकास की रीढ़ है।

ऐसे में कृषि से जुड़े सभी विभाग और वैज्ञानिक मिलकर कार्य करें, ताकि किसानों को वास्तविक लाभ मिले और उनकी उत्पादन क्षमता एवं आय में सतत वृद्धि हो। बैठक में मुख्य विकास अधिकारी सूरज पटेल, आचार्य नरेंद्र देव कृषि विश्वविद्यालय के प्रसार निदेशक डॉ राम बटुक सिंह, उप कृषि निदेशक सत्येंद्र कुमार, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. जी.के. शुक्ला, जिला उद्यान अधिकारी रणवीर सिंह, कृषि विज्ञान केंद्र कठौरा के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष नवनीत कुमार मिश्र, सीटेड के निदेशक संजय सिंह सहित अन्य अधिकारी, कृषि वैज्ञानिक एवं किसान मौजूद रहे।

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