Monday, February 23, 2026
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उन्नत टैवी प्रक्रिया से हृदय के वाल्व में गंभीर संकुचन से पीड़ित 67 वर्षीय मरीज का हुआ सफल इलाज

मैक्स हॉस्पिटल लखनऊ के डॉ. विजयंत देवेनराज की टीम ने किया ऑपरेशन

गोरखपुर। जिले की रहने वाली 67 वर्षीय पार्वती देवी को नई जिंदगी मिल गयी। कुछ समय पहले तक उनकी हालत ऐसी थी कि कुछ कदम चलते ही वो हांफने लगती थी लेकिन मैक्स सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल, लखनऊ के डॉक्टरों ने गोरखपुर की 67 वर्षीय महिला इस मरीज, जिन्हें गंभीर एओर्टिक स्टेनोसिस की समस्या थी, का सफल इलाज कर दिया। इलाज के बाद पार्वती देवी पिछले दिनों परिवार के साथ गंगा स्नान करके वापस आ गई हैं।

उनको जो बीमारी थी उसकी ऐसी स्थिति थी जिसमें कैल्शियम जमने और वाल्व की पत्तियों के मोटा होने के कारण दिल के एओर्टिक वॉल्व का मुंह संकरा हो जाता है, जिससे दिल से शरीर की ओर ख़ून के बहाव में रुकावट होती है। इस जटिल मामले का नेतृत्व मैक्स सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल, लखनऊ में कार्डियोथोरेसिक वैस्कुलर सर्जरी (सीटीवीएस) के सीनियर डायरेक्टर एवं विभागाध्यक्ष डॉ. विजयंत देवेनराज ने किया।

पार्वती देवी ने गोरखपुर में आयोजित ओपीडी के दौरान डॉ. विजयंत से संपर्क किया। उन्हें लगातार बढ़ती सांस फूलने की समस्या, अत्यधिक थकान, बार-बार झपकी आने और हाल ही में बेहोश होने की शिकायत थी। विस्तृत जांच, जिसमें इकोकार्डियोग्राफी और उन्नत इमेजिंग शामिल थी, से गंभीर एओर्टिक स्टेनोसिस की पुष्टि हुई। यह जानलेवा स्थिति हृदय के एओर्टिक वाल्व के अधिक सिकुड़ जाने के कारण होती है।

इसके बाद उन्हें मैक्स सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल, लखनऊ में टैवी प्रक्रिया कराने की सलाह दी गई। टैवी में क्षतिग्रस्त हृदय वॉल्व को पैर की नस के माध्यम से एक पतली नली डालकर बदला जाता है, जिससे ओपन हार्ट सर्जरी की आवश्यकता नहीं पड़ती।

डॉ. विजयंत देवेनराज ने कहा, “गंभीर एओर्टिक स्टेनोसिस अक्सर बुजुर्ग मरीजों में नजरअंदाज हो जाता है क्योंकि सांस फूलना और थकान को बढ़ती उम्र का असर मान लिया जाता है। समय पर इकोकार्डियोग्राफी से शुरुआती पहचान संभव है।

अब टैवी ने उपचार के तरीके को बदल दिया है। यह सुरक्षित और कम जोखिम वाली प्रक्रिया है, जिसमें तेज रिकवरी होती है, खासकर बुजुर्ग और ज़्यादा ख़तरे वाले मरीजों के लिए यह प्रक्रिया कारगर है। गोरखपुर में नियमित ओपीडी के माध्यम से हमारा प्रयास पूर्वी उत्तर प्रदेश के मरीजों तक उन्नत हृदय उपचार पहुंचाना है।

प्रक्रिया के 3 से 4 दिन के भीतर मरीज को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। फॉलो-अप इकोकार्डियोग्राफी में लगाया गया वाल्व सही तरह से काम करता पाया गया और किसी प्रकार का गंभीर रिसाव नहीं हुआ न ही कोई रुकावट ही दिखी। स्ट्रोक, ख़ून की नली को कोई क्षति या पेसमेकर की जरूरत जैसी कोई बड़ी जटिलता सामने नहीं आई।

मैक्स सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल, लखनऊ उत्तर प्रदेश और आसपास के क्षेत्रों में दिल के मरीज़ों के लिए उन्नत और कम चीरे वाले उपलब्ध कराने के अपने संकल्प को मजबूत कर रहा है। यह सफल मामला समय पर जांच, उचित रेफरल और टैवी जैसी अत्याधुनिक प्रक्रिया के यहां पर उपलब्ध होने के महत्व को दिखाता है, जो दिल के वॉल्व की जटिल बीमारियों से जूझ रहे बुजुर्ग मरीजों के जीवन को बेहतर बनाने में अहम भूमिका निभा सकती है।

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