भारत के बाहर अदाणी ग्रुप की उपलब्धि, Adani Copper को मिली वैश्विक पहचान, लंदन मेटल एक्सचेंज में रजिस्ट्रेशन

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अदाणी एंटरप्राइजेज की सहायक कंपनी कच्छ कॉपर लिमिटेड के ‘अदाणी कॉपर’ ब्रांड को लंदन मेटल एक्सचेंज (LME) से ब्रांड रजिस्ट्रेशन मिल गया है।

अदाणी ग्रुप की प्रमुख कंपनी अदाणी एंटरप्राइजेज लिमिटेड (AEL) की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी, कच्छ कॉपर लिमिटेड (KCL) ने एक बड़ी वैश्विक उपलब्धि हासिल की है। कंपनी के ‘अडानी कॉपर’ (Adani Copper) ब्रांड के ग्रेड-ए कैथोड्स को लंदन मेटल एक्सचेंज (LME) द्वारा ब्रांड रजिस्ट्रेशन प्राप्त हो गया है। यह जानकारी अदाणी एंटरप्राइजेज द्वारा जारी आधिकारिक मीडिया रिलीज के आधार पर दी गई है।

वैश्विक बाजार में बढ़ेगी साख LME द्वारा मिली यह मंजूरी अदाणी कॉपर को दुनिया के अग्रणी कॉपर ब्रांड्स की श्रेणी में खड़ा करती है। इस सर्टिफिकेशन का मतलब है कि अदाणी कॉपर के कैथोड्स अब अंतरराष्ट्रीय मानकों पर खरे उतरे हैं। 10 जुलाई, 2026 से ये कैथोड्स LME कॉपर फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट्स के तहत डिलीवरी के लिए पात्र होंगे। यह मान्यता अदाणी ग्रुप की विनिर्माण उत्कृष्टता और जिम्मेदार सोर्सिंग प्रथाओं की पुष्टि करती है।

मुंद्रा में दुनिया का सबसे बड़ा सिंगल-लोकेशन प्लांट

अदाणी ग्रुप गुजरात के मुंद्रा में दुनिया के सबसे बड़े सिंगल-लोकेशन कस्टम कॉपर स्मेल्टर परिसरों में से एक का संचालन कर रहा है। 1.2 बिलियन डॉलर के निवेश से तैयार इस प्लांट की क्षमता 0.5 मिलियन टन प्रति वर्ष है। यह अत्याधुनिक तकनीक और ऑटोमेशन से लैस है, जो भारत की घरेलू आपूर्ति को मजबूत करने में मदद करेगा।

आत्मनिर्भर भारत की ओर बड़ा कदम

इस उपलब्धि पर खुशी जताते हुए अदाणी एंटरप्राइजेज के नेचुरल रिसोर्सेज के सीईओ और कच्छ कॉपर लिमिटेड के एमडी डॉ. विनय प्रकाश ने कहा, “कॉपर वैश्विक ऊर्जा परिवर्तन (Energy Transition) की रीढ़ है। LME ब्रांड का दर्जा मिलना अदाणी को दुनिया के अग्रणी कॉपर उत्पादकों में शामिल करता है। यह भारत को रिफाइंड कॉपर के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने और वैश्विक सप्लाई चेन में देश की भूमिका को मजबूत करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है।”

LME सर्टिफिकेशन के फायदे

LME सर्टिफिकेशन एक बेहद कठिन प्रक्रिया है, जिसमें धातु की रासायनिक संरचना, आकार और वजन की कड़ी जांच की जाती है। इस लिस्टिंग के बाद अदाणी कॉपर को LME द्वारा अनुमोदित गोदामों में रखा जा सकेगा। इससे कंपनी को वित्तीय लचीलापन मिलेगा, क्योंकि LME-लिस्टेड धातु को एक ‘हाई लिक्विड एसेट’ माना जाता है, जिसका उपयोग कोलैटरल (Collateral) के रूप में भी किया जा सकता है।

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