शकील
लखनऊ।
कांग्रेस विधान परिषद सदस्य दीपक सिंह ने कहा कि लोकतंत्र में अच्छी सरकार का मतलब उसकी कार्यप्रणाली होती है। जनता को सरकार की योजनाओं का पूरा लाभ मिलना चाहिए। ऐसी सरकार जो जनता के लिए बजट तो पास कराए, लेकिन खर्च न करे तो यह लोकतंत्र में गुनाह है और संविधान की भावना का उल्लंघन है। श्री सिंह ने प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार पर वित्तीय वर्ष के अंतिम महीने में वित्तीय स्वीकृति और व्यय में पिछडऩे का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि इतनी धीमी रफ्तार से विकास योजनाओं के लिए बजट में की गयी व्यवस्था की वित्तीय स्वीकृति न होने से 31 मार्च तक हजारों करोड़ रुपये खर्च कर पाना संभव नहीं है। ऐसा प्रतीत होता है कि योगी सरकार एक वर्ष के बजट में दो साल काम चलाएगी।

श्री सिंह ने विभिन्न विभागों को स्वीकृत बजट और उसके सापेक्ष स्वीकृत धनराशि का आंकड़ा पेश करते हुए कहा कि कई विभागों में वित्तीय स्वीकृति जारी न होने से बजट का अधिकांश हिस्सा शेष है। प्रदेश के दो विभागों हथकरघा और गृह विभाग के तहत होमगार्ड विभाग ने ही बजट का 91 प्रतिशत से अधिक खर्च किया, जबकि कई विभागों में वित्तीय स्वीकृति जारी ही नहीं हुयी या बहुत कम की गयी है। किसानों के ऋण माफ करने के लिए 36687 करोड़ में से 28 हजार करोड़ से अधिक का आवंटन के बाद भी खर्च नहीं हो सका। फरवरी तक ऋण माफी के बजट का महज 57 प्रतिशत ही खर्च हुआ। श्री सिंह ने कहा कि योगी सरकार 19 मार्च को एक साल का कार्यकाल पूर्ण कर रही है। सरकार ने वित्तीय वर्ष का 3 लाख 62 हजार करोड़ रुपये का बजट मई में पेश किया था, जिसके बाद दिसम्बर में 11,388 करोड़ रुपये का अनुपूरक बजट भी पास कराया। साल के आखिरी महीने में प्रदेश सरकार की वित्तीय स्थिति में व्यय की भारी कमी दिख रही है। श्री सिंह ने कहा कि व्यय में कमी प्रदेश की विकास दर और रोजगार को प्रभावित करती है।





