Thursday, February 26, 2026
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नरेश अग्रवाल के कमल थामने की चर्चा

-राज्यसभा का टिक्ट न मिलने से सपा से नाराज
-अशोक बाजपेयी को रोकने की भी कोशि
सैयद निजाम अली
लखनऊ। समाजवादी पार्टी की ओर से आज यहां मशहूर अभिनेत्री व निर्वतमान सांसद जया बच्चन के राज्यसभा के लिए नामांकन पत्र दाखिल के समय पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव व राज्यसभा में पार्टी के उप  नेता नरेश अग्रवाल के विधानसभवन के सेंट्रल हाल में मौजूद न रहने पर समाजवादी पार्टी सहित सियासी गलियारों में यह चर्चा तेज हो गयी कि नरेश अग्रवाल, भाजपा का दामन थाम सकते है। उनके बारे में यह कहावत मशहूर भी है कि जहां सत्ता व नरेश अग्रवाल
कहा जा रहा है कि नरेश अग्रवाल को यह पहले ही एहसास हो गया था कि उनको इस बार टिक्ट नहीं दिया जायेगा। सपा के पास विधानसभा में केवल ४७ ही विधायक है। लेकिन नरेश अग्रवाल आखिर तक अपने टिक्ट के लिए एड़ी चोटी का जोर लगाये हुए थे।  उन्होंने भाजपा में संपर्क साधना शुरु कर दिया है।
दो दशक पहले नरेश अग्रवाल कंाग्रेस में थे फिर वहां से निकलकर उन्होंने चंद साथियों के साथ लोकतांत्रिक कांग्रेस बनायी और भाजपा की गठबंधन की सरकार में मंत्री रहे बाद में नरेश अग्रवाल समाजवादी पार्टी में शामिल हो गये। लेकिन जब २००७ केे विधानसभा चुनाव केे बाद मुलायम सिंह यादव की समाजवादी पार्टी की सरकार गयी और मायावती के नेतृत्व में बसपा की सरकार बनी तो नरेश अग्रवाल  यह कहते हुए बसपा मेें शामिल हो गये कि मैं अब तक कहां भटक रहा था अब बहनजी के साथ जिदंगी भर काम करुंगा लेकिन २०१२ के विधानसभा चुनाव में बसपा की हार से कुछ पहले ही नरेश अग्रवाल फिर समाजवादी पार्टी में शामिल हो गये और तत्कालीन पार्टी अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव से यह कहते हुए माफी मांगी कि नेताजी मुझसे बहुत बड़ी गलती हो गयी है।
२०१२ के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी सत्ता में आयी और अखिलेश यादव मुख्यमंत्री बन गये। मुलायम सिंह यादव ने नरेश अग्रवाल को न केवल पार्टी का राष्ट्रीय महासचिव बनाया बल्कि राज्यसभा भी भेजा और यहां उनके बेटे नितिन अग्रवाल को राज्यमंत्री बनवा दिया।२०१४ के लोकसभा चुनाव में लखनऊ संसदीय सीट से समाजवादी पार्टी ने पहले पूर्व
मंत्री अशोक बाजपेयी के नाम की घोषणा की लेेकिन ऐन मौके पर नरेश अग्रवाल की वजह सेे उनका टिक्ट काट कर ज्यमंत्री अभिषेक मिश्र को चुनाव मैदान में उतारा गया। जिसमें उनको भाजपा के तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह केे हाथों बुरी पराजय मिली। बाद मेें अशोक बाजपेयी को विधान परिषद मेें समायोजित किया गया। नरेेश अग्रवाल से छत्तीस का आंकड़ा होनेे से अशोक बाजपेयी अपनेे को सपा में काफी उपेक्षित महसूस करने लगे और कुछ माह पहले उन्होंने सपा को अलविदा कह कर भाजपा का दामन थाम लिया। कहा जा रहा है कि भाजपा अब अशोक बाजपेयी को राज्यसभा भेजने पर विचार कर रही है। इधर नरेश अग्रवाल, राज्यसभा का टिक्ट न मिलने से और अशोक बाजपेयी को राज्यसभा में जाने से रोकने के लिए भाजपा में जा सकते है इसकी आज यहां सपा कार्यालय और सियासी गलियारों में जोर से चर्चा रही। जब समाजवादी पार्टी में मुलायम की जगह अखिलेश यादव पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने और विद्रोह जैसी स्थिति हुई तो नरेश अग्रवाल ने अखिलेश यादव का ही साथ दिया था।
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