मलिहाबाद लखनऊ। राजधानी लखनऊ के मलिहाबाद में अमरूद की खेती करने वाले बी किसान नर्सरी के किसान जमाल खान ने बताया कि अमरूद की खेती पुस्तैनी बाप दादाओं के जमाने से अमरूद कलम की खेती करती आ रहे है।जिसके लिए अखिल भारतीय पुरस्कार से 1961में नवाजा गया था।

उसी पैतृक नर्सरी को जमाल अहमद खान बखूबी निभाते चले आ रहे।अपनी नर्सर्री में आधा दर्जन से ज्यादा अमरूद की नसले ,एल 49, अलाहाबादी, स्वेता, बर्फ खाना, सरबती किशान, संगम ललित इत्यादि किस्म के पौधे तैयार कर निजी व्यवसाय के तहत लगभग आधा दर्जन प्रदेश महाराट्र, राजस्थान, हरियाणा, छत्तीसगढ़, पंजाब, आदि में बी किसान नर्सर्री द्वारा निजी व्यवसायी किसानों को सप्लाई किया जाता है।यह भी बताया कि वर्ष में तीन से चार बार अमरूद की पौधतैयार की जाती है जो लगभग एक से दो लाख की संख्या में होती है।
बी किसान नर्सर्री के किसान ने बताया कि
तैयार पौधों की मुनासिफ लागत नही मिल पाने से मलिहाबाद क्षेत्र के किसानों में निराशा भी व्याप्त है जिसके कारण औने पौने दामों प्रदेशों में पौधे बेचने को मजबूर है। उत्तर प्रदेश में पौध सरकारी सप्लाई न होने चलते प्रदेश के कई जिले अमरूद की विभिन्न किस्में लगाने से वंचित रह जाते है।
पंचदेव यादव की रिपोर्ट





