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पेट पर अॉपरेशन का निशान होना किडनी चोरी की निशानी नहीं होता है : डॉ० संदीप तिवारी
निरीक्षण कमेटी के अधीन अॉपरेशन करवाये जाये

लखनऊ । राजधानी के केजीएमयू में किडनी निकाल लेने के आरोप का शुक्रवार को जवाब डॉ० संदीप तिवारी ने दिया । उन्होनें कहा कि लोग पेट की विभिन्न बिमारियों से ग्रसित हो कर अस्पताल आते है और अॉपरेशन करवा कर चले जाते है परंतु उनही में से कुछ लोग साल दो साल बाद वापस आ कर पेट में अॉपरेशन का निशान दिखा कर डॉक्टरों पर आरोप लगाने लगते है कि उनकीं किडनी चोरी कर ली गयी है ।
डॉक्टर संदीप तिवारी ने बताया कि हर किसी बीमारी का सिटी स्कैन या अल्ट्रासाउण्ड कराना असंभव होता है। इस विषय कुछ ऐसे लोग भी आते जिनकों पेट मे पथरी है उन्ही लोगो का सीटी स्कैन होता आदि होता है, लेकिन कुछ लोग ऐसे भी है जो पेट से सम्बंधित कुछ भी रोग हो, इलाज करवाने केजीएमयू आते है। वह लोग इलाज करा के चले जाते है, पर कुछ मामलों में वे 1 या 2 साल बाद आते है और कहने लगते हैं कि उनकी किडनी गायब हो गयी है। डॉ० संदीप ने कहा कि इसका विश्वास कुछ लोग इसलिए कर लेते है कि क्योकिं उनकें पेट मे चीरा लगा हुआ होता है या निशान वगैरा होता है । फिर बाद में एकपक्षीय मुकदमा कर दिया जाता है और जो डॉक्टर ऑपेरशन करता है उसकों फंसा दिया जाता है।
उन्होनें कहा कि इस विषय के लिए हाई लेवल कमेटी बनाई जाएगी ताकि ऐसी वारदात न हो पाये । इसमे मुख्य रूप से ट्रांसप्लांट की ऐसी व्यवस्था की जाये जिससे मरीज को शंका न रहे और कमेटी के देख रेख में ये अॉपरेशन करवाये जाये । डॉक्टरों को पाक साफ बतातें हुए कहा कि ऐसे भी हो सकता कि कहीं की गुर्दो का रैकेट धन्दा तो नही चल रहा है। किडनी चोरी के आरोप से डॉक्टरों को बचाने की और साथ ही जब तक जांच कमेटी की जांच न हो जाया करे तब तक एफआईआर न दर्ज की जाये। डॉ० संदीप तिवारी ने कहा कि इसमे अगर मानहानि का मुकदमा किया जाएगा तो हमारे केजीएमयू के चांसलर का आदेश होगा तभी ये मुकदमा किया जाये और साथ ही हमारे एडवोकेट के सुझाव पर ही ऐसी कार्यवाही की जाये ।
कुछ मामलों में वे 1 या 2 साल बाद आते है और कहने लगते हैं कि उनकी किडनी गायब हो गयी है
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