Tuesday, March 10, 2026
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गायत्री प्रजापति के प्रति दरियादिली महंगी पड़ गई

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यूपी के अमेठी जिले के मुंशीगंज थाने में पोस्टेड इंस्पेक्टर आरके सिंह को रेप के आरोपी पूर्व मंत्री गायत्री प्रजापति के प्रति दरियादिली महंगी पड़ गई। आरोप है कि रेप के मामले में पूर्व मंत्री के जमानत के पेपर्स वैरीफि‍केशन को प्राइवेट मंगाकर उन्हें वैरीफाई करने का इंस्पेक्टर ने दबाव बनाया, जिसमें जानकारी होने पर एसपी ने उन्हें सस्पेंड कर दिया।

क्या है पूरा मामला?
बीते मंगलवार को राजधानी लखनऊ की पास्को कोर्ट ने रेप के मामले में आरोपी पूर्व मंत्री गायत्री को जमानत दिया था। पूर्व मंत्री के जमानत में लगे गारंटी पेपर्स वैरीफीकेशन के लिए वहां से अमेठी भेजा गया। आरोप है कि अमेठी के मुंशीगंज थाने के इंस्पेक्टर आरके सिंह, जोकि मंत्री के करीब बताए जाते हैं। उन्होंने सम्बंधित पेपर्स को प्राइवेट मंगवा लिया। पेपर्स मिलते ही इंस्पेक्टर ने सम्बंधित थाने पर दबाव बनाया कि तत्काल वैरीफीकेशन करके पेपर्स उन्हें दिया जाए।

मोबाइल ट्रेसिंग से हुआ खुलासा
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, हाईप्रोफाइल मामला होने की वजह से आम आदमी के साथ-साथ शासन की भी निगाह इस केस पर थी। इंस्पेक्टर और पूर्व मंत्री के करीबियों के मोबाइल ट्रेसिंग पर थे, जिससे ये खुलासा हो सका। इसके बाद शासन ने इंस्पेक्टर को सस्पेंड कर दिया।
ये है इंस्पेक्टर का इतिहास
सपा सरकार में जिस वक्त पूर्व मंत्री गायत्री प्रजापति का प्रदेश सहित अमेठी में सिक्का चलता था उस समय अमेठी कोतवाली में बतौर एसआई तैनात आरके सिंह की भी तूती बोलती थी। जिस कोतवाली में वो एसआई थें उसी कोतवाली का उन्हें इंस्पेक्टर बना दिया गया था। बाद में शिकायतें मिली तो डिमोशन कर उन्हें दीवान बनाया गया और इस दौरान उनका ट्रांसफर उन्नाव जिले में कर दिया गया था। इसके बाद आरके सिंह ने छुट्टी ले ली और फिर कुछ दिनों के बाद वो वापस अमेठी में आमद कराने में सफल रहे। अमेठी में आमद के बाद उन्होंने अमेठी कोतवाली के इंस्पेक्टर पोस्ट को हासिल करने के लिए सोर्स लगाया, लेकिन अंत में उन्हें कमरौली थाने का इंचार्ज बनाया गया। कुछ दिन यहां पोस्टिंग के बाद उन्हें मुंशीगंज कोतवाली का इंस्पेक्टर बना दिया गया।

अदर डिस्ट्रि‍क के वैरीफीकेशन में लगते हैं 7 दिन
एसपी ने बताया, गैर जिले के जमानत के पेपर्स वैरीफि‍केशन में कम से कम एक हफ्ते का टाइम लगता है। लेकिन, एक दिन में हुए इस वैरीफि‍केशन में कुछ न कुछ संदेहास्पद पहलू छिपा है, जिसकी जांच भी कराई जा रही है।

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