नई दिल्ली: भारत की मेजबानी में आयोजित 18वें BRICS शिखर सम्मेलन ने वैश्विक मंच पर भारत की कूटनीतिक भूमिका को मजबूत करने का अवसर दिया है। 12-13 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में हुए सम्मेलन में न्यू दिल्ली घोषणा को स्वीकार किया गया, जिसमें आर्थिक सहयोग, नवाचार, सतत विकास, वैश्विक शासन में सुधार और विकासशील देशों की भागीदारी बढ़ाने जैसे मुद्दों पर जोर दिया गया।
घोषणाओं को अमल में बदलना सबसे बड़ी चुनौती
भारत की BRICS अध्यक्षता के दौरान 30 शहरों में 400 से अधिक बैठकें और कार्यक्रम आयोजित किए गए। इससे सहयोग के लिए व्यापक आधार तैयार हुआ, लेकिन अब असली परीक्षा इन बैठकों और समझौतों को व्यावहारिक परिणामों में बदलने की है।
विकसित भारत 2047 के लिए कूटनीतिक अवसर
BRICS भारत को ग्लोबल साउथ के देशों के साथ आर्थिक, तकनीकी और रणनीतिक साझेदारी मजबूत करने का मंच देता है। व्यापार, डिजिटल तकनीक, स्वास्थ्य, कृषि, ऊर्जा और आपूर्ति श्रृंखला जैसे क्षेत्रों में ठोस सहयोग भारत के विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों से जोड़ सकता है।
BRICS व्यापार मंत्रियों की बैठक में भी BRICS Economic Partnership Strategy 2030, MSME के लिए वित्तीय पहुंच और वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं को मजबूत करने जैसे मुद्दों पर प्रगति हुई थी।
कूटनीति से अब परिणाम तक का सफर
नई दिल्ली घोषणा में संवाद, परामर्श और कूटनीति के जरिए विवादों के शांतिपूर्ण समाधान पर जोर दिया गया। भारत के लिए चुनौती यह है कि BRICS को केवल घोषणाओं और बैठकों का मंच न रहने देकर व्यापार, निवेश, तकनीक और विकास के ठोस परिणाम देने वाला संगठन बनाया जाए।
निष्कर्ष: BRICS की अध्यक्षता ने भारत को अपनी वैश्विक प्राथमिकताओं को सामने रखने का महत्वपूर्ण अवसर दिया है। अब इसकी सफलता इस बात से तय होगी कि सम्मेलन में बनी सहमतियां कितनी तेजी और प्रभावी तरीके से जमीन पर उतरती हैं।





