मामले की शुरुआती जांच के दौरान मिखाइल ने पुलिस को कुछ दस्तावेज सौंपे थे। इनमें शीना बोरा का एक जन्म प्रमाणपत्र भी शामिल था, जिसमें उनके नाना-नानी को माता-पिता के रूप में दर्ज किए जाने की बात सामने आई थी। पुलिस सूत्रों ने उस समय इस दस्तावेज को कथित तौर पर फर्जी बताया था।
मिखाइल का आरोप है कि इंद्राणी ने शीना की असली पहचान छिपाने के लिए दस्तावेजों में बदलाव करवाए। इस मामले में जन्म प्रमाणपत्र और अन्य रिकॉर्ड जांच का हिस्सा रहे हैं। हालांकि, दस्तावेजों में कथित जालसाजी से जुड़े आरोपों को अदालत में साबित किया जाना बाकी है।
शीना बोरा की अप्रैल 2012 में हत्या का मामला वर्ष 2015 में सामने आया था। जांच के बाद इंद्राणी मुखर्जी समेत कई लोगों पर आरोप लगे। यह मामला देश के चर्चित आपराधिक मामलों में शामिल रहा है और इसकी कानूनी कार्यवाही लंबे समय से जारी है।
क्या है पूरा मामला?
शीना बोरा मुंबई में रहती थीं और अप्रैल 2012 में उनके लापता होने के बाद उनकी हत्या का मामला सामने आया। पुलिस जांच में उनकी मां इंद्राणी मुखर्जी, संजीव खन्ना और ड्राइवर श्यामवर राय के नाम सामने आए। बाद में मामले की जांच सीबीआई ने की।
मिखाइल बोरा की ओर से सामने आए दस्तावेजों और उनके बयानों ने मामले में परिवार की पहचान और पुराने रिकॉर्ड को लेकर कई सवाल खड़े किए थे। अब कोर्ट में उनके दावे पर भी चर्चा हो रही है।





