अलीगढ़। प्रदेश में पर्यटन एवं धार्मिक स्थलों के विकास की योजनाओं को अब केवल कागजी प्रस्तावों के आधार पर स्वीकृति नहीं मिलेगी। प्रत्येक परियोजना का पहले स्थलीय सत्यापन, जनहित एवं उपयोगिता का आकलन किया जाएगा। इसके उपरांत ही योजनाओं को अंतिम मंजूरी दी जाएगी, ताकि जनधन का प्रभावी एवं पारदर्शी उपयोग सुनिश्चित हो सके।
यह निर्देश प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने सोमवार को वित्तीय वर्ष 2026-27 की पर्यटन, संस्कृति एवं धर्मार्थ कार्य विभाग की प्रदेशव्यापी मंडलवार समीक्षा बैठक के शुभारंभ अवसर पर दिए। समीक्षा अभियान की शुरुआत अलीगढ़ मंडल से की गई, जहां अलीगढ़, कासगंज, एटा एवं हाथरस जिलों की पर्यटन परियोजनाओं की विस्तृत समीक्षा की गई। मंत्री ने कहा कि प्रदेश के सभी 18 मंडलों में इसी प्रकार समीक्षा बैठक के साथ स्थलीय निरीक्षण भी किया जाएगा।
उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रत्येक प्रस्ताव के साथ भूमि अभिलेख, नवीनतम स्थल फोटोग्राफ, व्यवहारिक लागत का आंकलन, ऐतिहासिक अथवा धार्मिक महत्व के प्रमाण और स्थानीय जनता एवं पर्यटकों को मिलने वाले लाभ का स्पष्ट विवरण प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा। साथ ही संबंधित विभाग, जिला प्रशासन एवं कार्यदायी संस्था की जवाबदेही भी पूर्व निर्धारित की जाएगी।
बैठक में अलीगढ़ मंडल की पर्यटन परियोजनाओं की प्रगति, गुणवत्ता एवं उपयोगिता का बिंदुवार परीक्षण किया गया। पर्यटन मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि निर्माण कार्यों की गुणवत्ता से किसी भी स्तर पर समझौता न किया जाए और लंबित परियोजनाओं को हर हाल में नवंबर 2026 तक पूर्ण कराया जाए। उन्होंने कहा कि सांसदों, विधायकों एवं विधान परिषद सदस्यों सहित स्थानीय जनप्रतिनिधियों को योजनाओं की नियमित जानकारी दी जाए और शिलान्यास एवं लोकार्पण कार्यक्रमों में उनकी सहभागिता सुनिश्चित की जाए।





