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मुडहरा गांव में जल संकट: बूंद-बूंद को तरस रहे ग्रामीण, पानी के संकट से नहीं हो रही युवाओं की शादी

नमामि गंगे योजना के तहत ढाई साल पहले बिछी थी पाइपलाइन, टेस्टिंग के बाद से नल सूखे; आक्रोशित महिलाओं ने खाली बर्तन रख जताया विरोध

महोबा। शहर कोतवाली के मुडहरा गांव में नमामि गंगे योजना के तहत करोडो रुपये की लागत से पानी की टंकी का निर्माण कराया साथ ही घर घर पानी पहुंचाने के लिए पाइप लाइन भी बिछाई गई, बावजूद इसके ग्रामीणों को बूंद बूंद पानी के लिए परेशान होना पड़ रहा है। तीन हैंडपंप और एक कुए के भरोसे पूरा गांव निर्भर है। इस समस्या का सबसे ज्यादा असर गांव की महिलाओं में पड़ने से उनमे आक्रोश व्याप्त है साथ ही गांव में पानी के संकट का असर अब गांव के युवाओं में पड़ने लगा है। पानी की किल्लत को देखते हुए कोई भी परिवार इस गांव के युवाओं को अपनी पुत्री का रिश्ता करने के लिए तैयार नहीं हैं। गांव में कोई धार्मिक व सामाजिक कार्यक्रम किया जाता है तो उसके लिए पानी के टैंकर मंगाना पड़ता है। इस समस्या को लेकर महिलाओं ने पानी के खाली बर्तन रखकर अधिकारियों से इस समस्या के समाधान की मांग की है।

सदर तहसील के मुड़हरा गांव में नमामि गंगे योजना के तहत पाइपलाइन बिछाई गई और पानी की टंकी का निर्माण भी कराया गया। ग्रामीणों का आरोप है कि ढाई साल बीत जाने के बाद भी उन्हें केवल पानी की टेस्टिंग ही देखने को मिली। टेस्टिंग के बाद से आज तक नलों से पानी की एक बूंद भी नहीं निकली। करीब 2 हजार की आबादी वाले इस गांव में लोग भीषण गर्मी के बीच केवल तीन हैंडपंपों और एक मंदिर के कुएं पर निर्भर हैं। इनमें से दो हैंडपंपों का पानी इतना खारा है कि उसे पीना तो दूर, सामान्य उपयोग में भी नहीं लाया जा सकता। बताया कि गांव के बाहर लगा एक मात्र हैंडपंप ही लोगों की प्यास बुझाने का सहारा बना हुआ है। गांव की महिलाओं सुमित्रा, संतोषी, सुमन आदि का कहना है कि उनकी पूरी जिंदगी पानी भरकर ले जाने में गुजर रही है। अब यही समस्या उनके बच्चों की पढ़ाई और भविष्य पर भी असर डाल रही है।

महिलाओं का कहना है कि दिन का बड़ा हिस्सा पानी की व्यवस्था करने में निकल जाता है, जिससे दूसरे काम प्रभावित होते हैं। गांव के बाहर लगे हैंडपंप में सुबह से शाम तक महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों की लंबी कतार में पानी के इंतजार में रहते हैं और जब पानी मिलने के बाद लंबी दूरी तय कर वापस जाते हैं तो उन्हें काफी थकान भी हो जाती है। बताया कि घरों में नहाने और कपडे धोने के लिए पर्याप्त पानी न होने पर पास के तालाब में जाना पड़ता है। महिलाओ के अलावा गांव के लोगों में प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के प्रति नाराजगी है। उकना आरोप है कि चुनाव दौरान विकास और हर घर जल के वादे किए गए, लेकिन जीतने के बाद किसी ने गांव की समस्या की सुध नहीं ली। अब गांववासी जल्द से जल्द पेयजल व्यवस्था दुरुस्त किए जाने की मांग कर रहे हैं।

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