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यूपी में बिजली कटौती का बड़ा कारण- मैनपावर की कमी, उपभोक्ता परिषद ने आयोग से की हस्तक्षेप की मांग

भीषण गर्मी में उत्तर प्रदेश में बिजली की पर्याप्त उपलब्धता के बावजूद, वितरण प्रणाली में मैनपावर की कमी के कारण उपभोक्ताओं को घंटों बिजली कटौती का सामना करना पड़ रहा है।

लखनऊ। भीषण गर्मी में बिजली की मांग लगातार बढ़ रही है। मांग के मुताबिक राज्य में बिजली की उपलब्धता भी है लेकिन शहर से लेकर गांव के ज्यादातर उपभोक्ताओं को तय शेड्यूल के अनुसार बिजली नहीं मिल पा रही है। उन्हें दिन ही नहीं रात में भी घंटों बिजली कटौती से जूझना पड़ रहा है।

बड़ा कारण यह है कि स्थानीय स्तर पर विद्युत वितरण के सिस्टम में कहीं भी बेक्रडाउन होने पर उसे जल्द ठीक करने के लिए न पर्याप्त संविदाकर्मी हैं और न ही अभियंता।

मैनपावर की कमी के चलते कहीं भी ट्रांसफार्मर से लेकर विद्युत लाइनों में गड़बड़ी होने पर उसे सही करने में घंटों का समय लग रहा है। इससे उपभोक्ताओं को हो रही दिक्कतों को देखते हुए उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने लोकमहत्व प्रस्ताव दाखिल कर सुझाव देने के साथ ही विद्युत नियामक आयोग से हस्तक्षेप करने की मांग की है।

पारा चढ़ने से राज्य में इनदिनों 30 हजार मेगावाट से भी अधिक बिजली की मांग है। सुबह से ही पारा चढ़ने से बिजली की मांग 24 घंटे में कभी भी 25,231 मेगावाट से नीचे नहीं जा रही है।

हालांकि, पहले से ही अनुमान लगाते हुए पावर कारपोरेशन प्रबंधन ने मांग के मुताबिक बिजली की उपलब्धता बना रखी है। प्रतिदिन बिजली की औसतन खपत भी उपलब्धता के आसपास 653 मिलियन यूनिट(एमयू) तक पहुंच रही है।

इसके आधार पर प्रबंधन का दावा है कि उद्योगों से लेकर महानगर, मंडल व जिला मुख्यालयों को 24 घंटे जबकि नगर पंचायतों को 22, तहसील को 21.52 घंटे, बुंदेलखंड को 20 घंटे बिजली दी जा रही है। कारपोरेशन की रिपोर्ट के अनुसार गांवों को 18 घंटे बिजली देने का शेड्यूल है लेकिन लगभग 17 घंटे बिजली दी गई है।

अब कागजों के आधार पर दावा चाहे जो किया जा रहा हो लेकिन 44,094 करोड़ रुपये के निवेश के बाद भी वास्तविक स्थिति तो यह है कि गांवों को रात में घंटों बिजली नहीं मिल रही है। शहरों में भी लोकल फाल्ड के चलते कई मुहल्लों में घंटों बिजली गुल रहती है।

उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश वर्मा का कहना है कि पहली बात तो उपभोक्ताओं को इसलिए निर्बाध बिजली नहीं मिल पा रही है क्योंकि मौजूदा विद्युत वितरण तंत्र पर दो करोड़ किलोवाट से अधिक का अतिरिक्त भार है।

मैनपावर की कमी के चलते बेहतर रखरखाव नहीं हो रहा जिससे ब्रेकडाउन हो रहे हैं। ठीक करने के लिए पर्याप्त संविदाकर्मी ही नहीं है क्योंकि बड़ी संख्या में उन्हें बर्खास्त किया जा चुका है। इतना ही नहीं बिजली कंपनियों में काफी संख्या में सहायक अभियंता निलंबित चल रहे हैं। वर्टिकल व्यवस्था लागू होने से भी दिक्कतें बनी हुई हैं।

वर्मा ने बिजली व्यवस्था सुधारने के लिए सुझाव दिया कि संविदाकार्मिकों व अभियंताओं की तत्काल बहाली हो। अतिरिक्त तकनीकी कर्मियों को लगाया जाए। वर्टिकल व्यवस्था समाप्त कर शिकायत निस्तारण प्रणाली की समीक्षा की जाए और गैंग बढ़ाकर ब्रेकडाउन रिस्पांस सिस्टम मजबूत किया जाए ताकि बिजली व्यवस्था को पटरी पर लाया जा सकता है।

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