बिना दान-दहेज के बेहद सादगी से संपन्न हुआ विवाह

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दो घंटे के अंदर निकाह और विदाई हुई संपन्न

डुमरियागंज सिद्धार्थनगर। आज के आधुनिक दौर में जहां शादियां फिजूलखर्ची और तड़क-भड़क का पर्याय बनती जा रही हैं। वहीं डुमरियागंज नगर पंचायत में एक ऐसा विवाह संपन्न हुआ जो समाज के लिए प्रेरणा बन गया है। नगर पंचायत डुमरियागंज के निवासी दूल्हे के पिता शहाबुद्दीन के सुपुत्र अबू तलहा और दुल्हन के पिता जमील की सुपुत्री रेशमा निवासी महसोन जिला बस्ती का विवाह बिना किसी दान-दहेज और तामझाम के बेहद सादगी के साथ संपन्न हुआ।सोमवार शाम 8 बजे डुमरियागंज नगर पंचायत वार्ड नंबर 2 आजाद नगर से बारात निकली लगभग 9:30 बारात बस्ती जिले के एक मैरेज हाल में पहुंची।

जहां मौलाना (इमाम) द्वारा 15 से 20 मिनट में लगभग 4 लाख 82 हजार 280 रुपए के जेवरात पर मेहर के साथ निकाह सम्पन्न हुआ। बारात पहुंचने के बाद 2 घंटे के अंदर निकाह भोजन और लड़की की विदाई सब कुछ सम्पन्न हुआ। बारात में कुल लगभग 15 से 20 बाराती शामिल थे। विवाह में न तो कोई बैंड-बाजा था, न ही फिजूलखर्ची वाली लाइटिंग। दोनों पक्षों के केवल गिने-चुने पारिवारिक सदस्य ही इस मांगलिक कार्य के साक्षी बने। विवाह की सभी जरूरी रस्में सादगी से पूरी कर ली गईं।

यदि समाज का हर वर्ग इसी तरह फिजूलखर्ची और दहेज जैसी कुप्रथाओं को त्यागकर सादगी से विवाह करने लगे, तो किसी भी गरीब बेटी का पिता कर्ज के बोझ तले नहीं दबेगा। यह विवाह वाकई युवा पीढ़ी के लिए एक बेहतरीन मिसाल है। दुल्हा अबू तलहा मुंबई में खुद का अच्छा खासा खुद का व्यवसाय करते है। वहीं दुल्हा अबू तलहा का कहना है कि मैने पहले से ही दिल में ये सोच रखा था कि अपनी शादी बिना ताम झाम के और सादगी से शादी करूंगा। खुदा का शुक्र है कि आज सादगी से शादी संपन्न हुआ।

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