भारत में सोने की खरीद को नियंत्रित करने और विदेशी मुद्रा बचाने के लिए 1963 में ‘गोल्ड कंट्रोल एक्ट’ लागू किया गया था। यह कानून 1990 में रद्द कर दिया गया।
क्या आप जानते हैं कि भारत में एक ऐसा कानून था जो लोगों की सोने की खरीदारी पर नियंत्रण रखता था, लेकिन इसे बंद कर दिया गया। आखिर क्यों और कब? हाल ही में पीएम मोदी ने देशवासियों से एक साल तक सोने की खरीदारी टालने को कहा, जिसके बाद गोल्ड कंट्रोल एक्ट (Gold Control Act) फिर से सुर्खियों में आ गया। यह कानून सरकार द्वारा, सोने की खरीदारी पर एक सख्त कानून था। गोल्ड कंट्रोल एक्ट, भारत सरकार द्वारा लागू किया गया एक कानून था, जिसका मुख्य उद्देश्य देश में सोने की भारी मांग को नियंत्रित करना और विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserves) को बचाना था।
स्वर्ण नियंत्रण कानून की शुरुआत 1963 में ‘गोल्ड कंट्रोल रूल्स’ के रूप में हुई थी, जिसे बाद में 1968 में एक पूर्ण कानून (Gold Control Act, 1968) बना दिया गया। लेकिन, साल 1990 में तत्कालीन वित्त मंत्री मधु दंडवते ने इस गोल्ड कंट्रोल एक्ट को पूरी तरह से निरस्त कर दिया, आइये जानते हैं क्यों?
क्यों लाया गया था गोल्ड कंट्रोल कानून?
भारत में सोने की खरीदारी पर नियंत्रण के मकसद से 1963 में गोल्ड कंट्रोल रूल्स लाए गए थे। दरअसल, उस समय भारत-चीन युद्ध के बाद देश की अर्थव्यवस्था और विदेशी मुद्रा भंडार बेहद नाजुक स्थिति में पहुंच गए थे। उस दौरान देश में लोग भारी मात्रा में सोना खरीद रहे थे, और डिमांड की आपूर्ति के लिए सरकार को भारी मात्रा में गोल्ड इंपोर्ट करना पड़ रहा था।
ऐसे में सोने के आयात पर काफी विदेशी मुद्रा खर्च हो रही थी। ऐसे हालात में सरकार ने सोने के आयात और तस्करी को रोकने के लिए गोल्ड कंट्रोल रूल्स को लागू किया, और यही नियम आगे चलकर कानून में तब्दील हो गए।
गोल्ड कंट्रोल एक्ट से जुड़े नियम क्या थे?
- गोल्ड कंट्रोल एक्ट में शुद्ध सोने की खरीदी पर पाबंदी थी। मसलन आप शुद्ध सोने के बिस्कुट या सिक्के नहीं खरीद सकते थे।
- इस कानून के तहत लोगों को सिर्फ गहनों के रूप में ही सोना रखने की इजाजत थी, और वह भी एक निश्चित सीमा तक।
- आम आदमी के साथ-साथ सर्राफा व्यापारियों के काम पर भी गोल्ड कंट्रोल एक्ट में कड़े प्रतिबंध और लाइसेंसिंग नियम लागू किए गए थे।
- इस कानून में गोल्ड रखने की लिमिट तय की गई थी। इसमें विवाहित महिला सिर्फ 500 ग्राम सोना रख सकती थीं, जबकि अविवाहित महिला को 250 ग्राम सोना रखने की
छूट थी। वहीं, पुरुष 100 ग्राम रख सकते थे।
क्यों खत्म करना पड़ा यह कानून?
गोल्ड कंट्रोल एक्ट, भारत में 22 साल तक प्रभावी रहा। लेकिन, इसके बाद यह स्पष्ट हो गया कि यह कानून तस्करी रोकने और सोने का मोह कम करने में पूरी तरह नाकाम रहा है, इसलिए 1990 में आर्थिक सुधारों की शुरुआत से ठीक पहले इस एक्ट को खत्म कर दिया गया।
गोल्ड कंट्रोल एक्ट अपने मकसद में बुरी तरह विफल हुआ। क्योंकि, खरीदारी पर नियंत्रण होने से सोने की आधिकारिक सप्लाई रुकी, तो सोने की तस्करी चरम पर पहुंच गई।





