Tuesday, May 12, 2026
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फरिहा वृद्धा आश्रम में इंजीनियर सुनील कुमार बुजुर्गों के बीच पहुंचे सोपा अंग वस्त्र और जाना उनका हाल

आजमगढ़l कहते हैं कि अगर किसी का दुख देखकर आपका हृदय भी पिघल जाए, तो समझ लीजिए कि इंसानियत आज भी ज़िंदा है। कुछ ऐसा ही भावुक और प्रेरणादायक दृश्य आजमगढ़ जिले के फरिहा स्थित वृद्धाश्रम में देखने को मिला, जब समाजसेवी एवं उद्यमी इंजीनियर सुनील कुमार यादव वहाँ पहुंचे और बुज़ुर्गों के बीच अपना समय बिताया।

वृद्धाश्रम में पहुंचते ही उन्होंने वहां रह रहे बुज़ुर्गों का हालचाल जाना और उनके साथ आत्मीयता से बातचीत की। कई बुज़ुर्ग ऐसे थे जिनकी आंखों में अपनेपन की कमी साफ दिखाई दे रही थी, लेकिन जैसे ही इंजीनियर सुनील कुमार यादव उनके बीच बैठे, उनके चेहरे खिल उठे। उन्होंने न केवल वृद्धजनों के दुख-सुख सुने बल्कि अपने हाथों से उन्हें भोजन भी कराया। यही नहीं, वह खुद उन्हीं लोगों के साथ बैठकर उसी थाली में भोजन करते दिखाई दिए। इस दृश्य ने यह साबित कर दिया कि यह केवल दिखावा नहीं, बल्कि सच्ची संवेदना और अपनापन था।

इस दौरान उन्होंने वृद्धजनों को अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया और उन्हें यह भरोसा दिलाया कि भले ही अपनों ने उन्हें अकेला छोड़ दिया हो, लेकिन समाज में आज भी ऐसे लोग हैं जो उन्हें अपना परिवार मानते हैं। उनके इस व्यवहार से कई बुज़ुर्ग भावुक हो उठे और उनकी आंखें नम हो गईं।

मीडिया से बातचीत में इंजीनियर सुनील कुमार यादव ने कहा कि माता-पिता की सेवा करना हर संतान का पहला कर्तव्य है। उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि लगातार बढ़ते वृद्धाश्रम इस बात का संकेत हैं कि समाज कहीं न कहीं अपने नैतिक मूल्यों से दूर होता जा रहा है। उन्होंने लोगों से अपील करते हुए कहा कि जिन माता-पिता ने अपने बच्चों को जन्म दिया, उन्हें पाल-पोसकर बड़ा किया और अपने सपनों का त्याग कर उन्हें काबिल बनाया, आज वही माता-पिता अपने ही बच्चों से दूर होकर वृद्धाश्रम में रहने को मजबूर हैं।

उन्होंने कहा कि अगर बचपन में माता-पिता भी अपने बच्चों को यूं ही छोड़ देते, तो शायद उनका भविष्य ही अंधकारमय हो जाता। आज जब माता-पिता को सबसे ज्यादा सहारे और प्यार की जरूरत है, तब उन्हें अकेला छोड़ देना मानवता के खिलाफ है।

अंत में उन्होंने समाज से अपील करते हुए कहा कि मानवता को शर्मसार मत होने दीजिए। अपने माता-पिता और बुज़ुर्गों का सम्मान करें, क्योंकि यही हमारी संस्कृति और संस्कारों की असली पहचान है। इंजीनियर सुनील कुमार यादव का यह मानवीय कदम अब लोगों के लिए प्रेरणा बनता जा रहा l

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