Saturday, May 2, 2026
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‘अंडमान सागर में भारत की मौजूदगी होगी मजबूत’, ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट पर केंद्र ने दिया राहुल गांधी को जवाब

सरकार ने राहुल गांधी के ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट पर हमले का जवाब दिया है। इसे अंडमान सागर में भारत की रणनीतिक मौजूदगी मजबूत करने वाली पहल बताया।

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट को लेकर किए गए हमले के बाद सरकार ने एक विस्तृत स्पष्टीकरण जारी किया है। सरकार ने इसे अंडमान सागर में भारत की मौजूदगी को मजबूत करने वाली एक रणनीतिक पहल बताया है।

सरकार ने कहा कि कि इस प्रोजेक्ट का मकसद पोर्ट-आधारित विकास और पर्यावरण सुरक्षा के उपायों के बीच संतुलन बनाना है और साथ ही इसकी पूरी योजना के केंद्र में वहां के मूल निवासियों की सुरक्षा को रखा गया है।

राहुल गांधी ने बताया था खतरा

यह स्पष्टीकरण तब आया जब बुधवार को लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने 81,000 करोड़ रुपये की इस पहल की कड़ी आलोचना करते हुए इसे पर्यावरण और वहां के मूल निवासियों, दोनों के लिए एक गंभीर खतरा बताया था।

सरकार ने क्या कहा?

वहीं, सरकार ने कहा कि यह प्रोजेक्ट रणनीतिक, रक्षा और राष्ट्रीय महत्व का है, जिसे पूरी जांच-पड़ताल और गहन विचार-विमर्श के बाद शुरू किया गया है।

सरकार ने कहा, “यह प्रोजेक्ट अंडमान सागर और दक्षिण-पूर्व एशिया में भारत की मौजूदगी को काफी हद तक मजबूत करेगा, हमारी समुद्री और रक्षा क्षमताओं को बढ़ाएगा और इस द्वीप को वैश्विक व्यापार और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क से जोड़ेगा। इसके अलावा, यहां एक बड़ा अंतरराष्ट्रीय ट्रांसशिपमेंट टर्मिनल भी बनाया जाएगा।”

सरकार ने कहा कि इस प्रोजेक्ट के संभावित पर्यावरणीय प्रभावों की पूरी तरह से पहचान और आकलन कर लिया गया है और एक मजबूत पर्यावरणीय प्रभाव आकलन प्रक्रिया के जरिए उन्हें नियंत्रित किया जा रहा है।

आदिवासियों की सुरक्षा को लेकर सरकार ने क्या कहा?

आदिवासी समुदायों की सुरक्षा के बारे में सरकार ने कहा, “सभी वैधानिक प्रक्रियाओं और नीतिगत सुरक्षा उपायों का पूरी तरह से पालन किया गया है। सक्षम अधिकारियों और क्षेत्र के विशेषज्ञों के साथ जरूरी परामर्श किए गए, जो जारवा नीति, 2004 और शोम्पेन नीति, 2015 के अनुरूप थे। अधिकार प्राप्त समिति ने स्पष्ट रूप से यह सुनिश्चित किया है कि विशेष रूप से कमजोर आदिवासी समूहों के हितों पर कोई बुरा असर नहीं पड़ेगा।”

सरकार ने आगे कहा, “इस प्रोजेक्ट को जनजातीय मामलों के मंत्रालय से ‘अनापत्ति प्रमाण पत्र’ (NOC) भी मिल गया है, जिसमें वन अधिकार अधिनियम, 2006 का पूरी तरह से पालन किया गया है।”

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