अंबेडकरनगर जनपद में ग्राम पंचायत सचिव गंगाराम गुप्ता से जुड़े मामले में तैयार की गई जांच आख्या के लोकायुक्त कार्यालय को प्रेषित होने के बाद मामला और गरमा गया है। शिकायतकर्ता शैलेन्द्र कुमार श्रीवास्तव की ओर से लगाए गए आरोपों और जांच समिति की रिपोर्ट में दिए गए निष्कर्षों के बीच विरोधाभास ने नए सवाल खड़े कर दिए हैं।जिलाधिकारी अंबेडकरनगर के माध्यम से लोक आयुक्त, उत्तर प्रदेश को भेजी गई आख्या में बताया गया है कि शासन के निर्देश पर उपजिलाधिकारी टाण्डा और खण्ड विकास अधिकारी टाण्डा की द्विसदस्यीय समिति गठित कर मामले की जांच कराई गई। 26 जुलाई 2022 को समिति द्वारा संयुक्त हस्ताक्षरित जांच रिपोर्ट प्रस्तुत की गई, जिसे आवश्यक कार्रवाई हेतु अग्रसारित कर दिया गया है।शिकायतकर्ता ने गंगाराम गुप्ता पर आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने, रिश्तेदारों के नाम पर व्यवसाय संचालित करने और अवैध संपत्ति छिपाने जैसे गंभीर आरोप लगाए थे।
खासतौर पर साले गिरीशचन्द के नाम से संचालित “ए०एस० ईंट उद्योग” को लेकर सवाल उठाए गए, जिसमें आरोप था कि वास्तविक संचालन गुप्ता द्वारा किया जा रहा है।जांच आख्या में गंगाराम गुप्ता ने सभी आरोपों को निराधार और मनगढ़ंत बताया है। उनके अनुसार—ईंट भट्ठा गिरीशचन्द और उनके साझेदार सतीराम के नाम से विधिवत पंजीकृत है और उसमें उनका कोई आर्थिक संबंध नहीं है।आवास, ट्रैक्टर आदि संपत्तियां पैतृक हैं, जो उनके पिता द्वारा अर्जित की गई हैं।चार पहिया वाहन (विटारा ब्रेजा) उनकी पत्नी द्वारा ऋण और उधार लेकर खरीदा गया था, जिसे बाद में आर्थिक स्थिति खराब होने पर बेच दिया गया।परिवार की आय कृषि, पशुपालन और पुश्तैनी व्यवसाय से जुड़ी रही है जांच में यह भी उल्लेख किया गया है कि गुप्ता के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति के ठोस साक्ष्य नहीं मिले।
उन्होंने अपने पक्ष में 36 पन्नों के दस्तावेज भी प्रस्तुत किए हैं, जिनमें नियुक्ति पत्र, भूमि से जुड़े अभिलेख, रजिस्ट्री दस्तावेज और व्यापार पंजीकरण शामिल हैं।गंगाराम गुप्ता ने पलटवार करते हुए कहा है कि शिकायतकर्ता द्वारा बार-बार आरटीआई और शिकायतों के माध्यम से दबाव बनाकर अवैध धन की मांग की गई, जिसे न देने पर झूठी शिकायतें की गईं। उनका दावा है कि यह पूरा मामला उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित करने की साजिश है।मामला अब लोकायुक्त के समक्ष है, जहां इस जांच आख्या के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। हालांकि, जिस तरह से दोनों पक्षों के आरोप-प्रत्यारोप सामने आए हैं, उससे यह प्रकरण और अधिक संवेदनशील हो गया है।नजरें अब इस पर टिकी हैं कि लोकायुक्त इस रिपोर्ट को अंतिम मानते हैं या फिर निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए दोबारा उच्चस्तरीय जांच के आदेश देते हैं।





