लखनऊ में पेट्रोल-डीजल की किल्लत खत्म हो गई है, पंपों पर भीड़ नहीं है। हालांकि, घरेलू और कमर्शियल एलपीजी सिलेंडरों का संकट बरकरार है। गोमती नगर विस्तार की सीमा गैस एजेंसी में 15 मार्च से डिलीवरी पेंडिंग है।
लखनऊ। राजधानी में पेट्रोल-डीजल से लोगों को पूरी तरह से फिलहाल राहत मिल गई है। पेट्रोल पंपों पर लाइनें नहीं लग रही है। कई पंपों पर तो रविवार की दोपहर सन्नाटा भी रहा। पंप संचालकों के मुताबिक लोगों ने पर्याप्त मात्रा में अपने वाहनों में डीजल व पेट्रोल डलवा लिया है, इसलिए अब मारामारी बिल्कुल खत्म हो गई है।
वहीं, कमर्शियल सिलिंडर को लेकर संकट बना हुआ है। होटल, रेस्तरां व ढाबों के संचालकों को भट्ठियो पर काम करना पड़ रहा है। उधर, गोमती नगर विस्तार स्थित सीमा गैस एजेंसी घरेलू सिलिंडर की डिलिवरी नहीं कर पा रहा है।
15 मार्च की पेंडेंसी अभी तक पूरी नहीं हो पायी है। सैकड़ों उपभोक्ता सीमा गैस एजेंसी के चक्कर लगाने को विवश हैं। यही स्थिति कई गैस एजेंसी की राजधानी में बनी हुई है।
आलमबाग पेट्रोल पंपों पर कार्यरत कर्मियों ने बताया कि पेट्रोल और डीजल पर्याप्त मात्रा में हैं। तेल लेने आए राजेश यादव ने बताया कि पिछले कुछ दिनों से भीड़ थी, आज तक कोई लाइन ही नहीं है। आसानी से पेट्रोल मिल रहा है।
सलीम खान के मुताबिक सुबह-शाम दोनों समय बिना किसी इंतजार के तेल मिल रहा है। कमर्शियल सिलिंडर की आपूर्ति न होने से मेस संचालक, टिफिन सर्विस चालने वाले परेशान है। उनका व्यापार पूरी तरह से चौपट हो गया है।
हजरतगंज में मेस संचालक धर्मपाल सिंह कहते हैं कि भट्ठी में खाना बनाना हर आदमी के लिए आसान नहीं है। इसके कारीगर महंगे मिल रहे है। लकड़ी, कोयले के दाम पांच से आठ रुपये प्रति किलो तक बढ़ा दिए गए हैं। ऐसे में दस से बीस रुपये प्रति टिफिन बढ़ाना मजबूरी है।
कमर्शियल सिलिंडर मिलने लगेगा तो पुराने रेट पर ही टिफिन दिया जाएगा। वर्तमान में पुराने कस्टमर की नाराजगी भी झेलनी पड़ रही है। क्योंकि उन्हें पुराने दामों पर ही टिफिन चाहिए।
मेस संचालक करन मौर्य कहते हैं कि एक भट्ठी पर खाना बनाने के कारण देर हो जाती है, गैस के चूल्हे में दो बर्नर होते है। इसलिए दूसरी भट्ठी बनवानी पड़ रही है। भट्ठी भी साढ़े तीन से चार हजार के बीच अब बना रही है। पहले ढाई हजार तक मिल जाती थी।
मेस संचालक सत्यम शुक्ला नरही और आस-पास के क्षेत्र में टिफिन देते हैं। उनके मुताबिक कुछ छात्र प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं, उनको टिफिन सिर्फ दे रहे हैं, बाकी को बंद करना पड़ा क्योंकि गैस ही नहीं है?
क्या कहते हैं छात्र?
नीट की तैयारी कर रहे छात्र हिमांशु वर्मा बताते हैं कि छोटे सिलिंडर की रिफलिंग लगभग बंद हो गई है। जहां मिल भी रही है, वहां तीन सौ रुपये प्रति किलो है। कुछ मेस संचालकों ने भी खाने के दाम बढ़ा दिए हैं। वहीं बाजार में इंडक्शन कुक टाप की कीमत में पांच से आठ प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हुई है।
श्री लक्ष्मण गौशाला में भी भट्ठी पर बना रहा भोजन
जानकीपुरम स्थित श्री लक्ष्मण गौशाला में भट्ठी पर भोजन सुबह व शाम का बन रहा है। मेस व टिफिन सर्विस सेवा प्रभावित होने के बाद से बड़ी संख्या में बाहरी लोगों की संख्या रसोई में बढ़ गई है। यहां मात्र 35 रुपये में भरपेट भोजन की व्यवस्था है।
गौशाला के अध्यक्ष प्रभु जालान व प्रबंधक गजेंद्र सिंह कहते हैं कि कमर्शियल सिलिंडर करीब पंद्रह दिन से नहीं मिल रहे हैँ। उसके बाद से खाना भट्टी में बन रहा है। सुपरवाइजर योगेन्द्र के मुताबिक भट्ठी का खाना गैस की तुलना में स्वादिष्ट बन रहा है।





