हरदोई/बिलग्राम, इतवार सुबह 8 बजे — कस्बा बिलग्राम में हज़रत ख़्वाजा इमादुद्दीन चिश्ती रहमतुल्लाह अलैहि का 815वां कुल शरीफ बड़े ही अकीदत और एहतराम के साथ सम्पन्न हुआ। इस मौके पर दूर-दराज़ से आए जायरीनों और अकीदतमंदों ने शिरकत कर फातिहा पढ़ी और दुआएं मांगीं।
कुल शरीफ हज़रत सैय्यद उवैसे मुस्तफा वास्ती की सरपरस्ती में मुकम्मल हुआ, जबकि इसकी निगरानी सैय्यद फ़ैजान मियां वास्ती, सैय्यद सालार हसन वास्ती, सैय्यद हाशिम मियां वास्ती और मौलवी फैज़ आलम ने की। कार्यक्रम का आगाज़ नमाज़-ए-फज्र के बाद कुरानख्वानी से हुआ, जिसके बाद नात व मनकबत पेश कर ख़्वाजा साहब को खिराज-ए-अकीदत पेश किया गया।
हज़रत ख़्वाजा इमादुद्दीन चिश्ती रहमतुल्लाह अलैहि बिलग्राम के बुजुर्गों में एक आला मुकाम रखते हैं। माना जाता है कि आपने हज़रत खिज्र अलैहिस्सलाम से रूहानी तालीम हासिल की। आपके बारे में यह भी रिवायत है कि पैदाइश के वक्त आपने तीन बार “अल्लाहु अकबर” कहा। आपके वालिद सैय्यद हसन कूदसरहु का सिलसिला सात पुश्तों के ज़रिए हज़रत इमाम काज़िम रज़ियल्लाहु अन्हु तक पहुंचता है।
कुल शरीफ के समापन के बाद लंगर तकसीम किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों ने हिस्सा लिया। इस दौरान अंजुमन आशिकाने रसूल कमेटी के सभी मेंबर मौजूद रहे और इंतज़ामात को बखूबी संभाला। पूरा माहौल अकीदत, भाईचारे और रूहानी फिज़ा से सराबोर रहा।





